प्रत्यर्थियौवतवतंसतमालमालो-
न्मीलत्तमः प्रकरतस्करशौर्यसूर्ये ।
अस्मिन्नवन्तिनृपतौ गुणसंततीनां
विश्रान्तिधामनि मनो दमयन्ति किं ते ॥
प्रत्यर्थियौवतवतंसतमालमालो-
न्मीलत्तमः प्रकरतस्करशौर्यसूर्ये ।
अस्मिन्नवन्तिनृपतौ गुणसंततीनां
विश्रान्तिधामनि मनो दमयन्ति किं ते ॥
न्मीलत्तमः प्रकरतस्करशौर्यसूर्ये ।
अस्मिन्नवन्तिनृपतौ गुणसंततीनां
विश्रान्तिधामनि मनो दमयन्ति किं ते ॥
अन्वयः
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हे दमयन्ति, प्रत्यर्थियौवतवतंसतमालमाला-उन्मीलत्-तमः-प्रकर-तस्कर-शौर्य-सूर्ये, गुणसंततीनाम् विश्रान्तिधामनि अस्मिन् अवन्तिनृपतौ ते मनः किम् (रमते)?
Summary
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O Damayanti, is your mind drawn to this king of Avanti? His valor is a sun that steals away the mass of darkness spreading from the Tamala-leaf garlands worn as ear-ornaments by the young wives of his enemies. He is the ultimate resting place for all virtues.
पदच्छेदः
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| प्रत्यर्थियौवतवतंसतमालमाला | प्रत्यर्थिन्–यौवत–वतंस–तमाल–माला | the garland of Tamala leaves in the ear-ornaments of the enemy's young women |
| उन्मीलत् | उन्मीलत् (उद्√मील्+शतृ) | spreading |
| तमः | तमस् | darkness |
| प्रकर | प्रकर | mass |
| तस्कर | तस्कर | thief |
| शौर्य | शौर्य | valor |
| सूर्ये | सूर्य (७.१) | in the sun |
| अस्मिन् | इदम् (७.१) | in this |
| अवन्तिनृपतौ | अवन्ति–नृपति (७.१) | in the king of Avanti |
| गुणसंततीनाम् | गुण–संतति (६.३) | of the multitudes of virtues |
| विश्रान्तिधामनि | विश्रान्ति–धामन् (७.१) | in the resting place |
| मनः | मनस् (१.१) | mind |
| दमयन्ति | दमयन्ती (८.१) | O Damayanti |
| किम् | किम् | is? |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | त्य | र्थि | यौ | व | त | व | तं | स | त | मा | ल | मा | लो |
| न्मी | ल | त्त | मः | प्र | क | र | त | स्क | र | शौ | र्य | सू | र्ये |
| अ | स्मि | न्न | व | न्ति | नृ | प | तौ | गु | ण | सं | त | ती | नां |
| वि | श्रा | न्ति | धा | म | नि | म | नो | द | म | य | न्ति | किं | ते |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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