जाम्बूनदं जगति विश्रुतिमेति मृत्स्ना
कृत्स्नापि सा तव रुचा विजितश्रि ।
यस्याः तज्जाम्बवद्रवभवास्य सुधाविधाम्बुः
जम्बूसरिद्वहति सीमनि कम्बुकण्ठि ॥
जाम्बूनदं जगति विश्रुतिमेति मृत्स्ना
कृत्स्नापि सा तव रुचा विजितश्रि ।
यस्याः तज्जाम्बवद्रवभवास्य सुधाविधाम्बुः
जम्बूसरिद्वहति सीमनि कम्बुकण्ठि ॥
कृत्स्नापि सा तव रुचा विजितश्रि ।
यस्याः तज्जाम्बवद्रवभवास्य सुधाविधाम्बुः
जम्बूसरिद्वहति सीमनि कम्बुकण्ठि ॥
अन्वयः
AI
हे कम्बुकण्ठि, जगति (या) मृत्स्ना जाम्बूनदम् (इति) विश्रुतिम् एति, सा कृत्स्ना अपि तव रुचा विजितश्रीः (अस्ति) । यस्याः (मृत्स्नायाः) सीमनि, अस्य (जम्बूद्वीपस्य) जाम्बवद्रवभवा सुधाविधाम्बुः तत् जम्बूसरित् वहति ।
Summary
AI
O conch-necked one, the earth of this land, famed in the world as 'Jambunada' (gold), has its splendor surpassed by your radiance. On its border flows the Jambu river, originating from the juice of the Jambu fruit, and its water is like nectar.
पदच्छेदः
AI
| जाम्बूनदम् | जाम्बूनद (१.१) | gold |
| जगति | जगत् (७.१) | in the world |
| विश्रुतिम् | विश्रुति (२.१) | fame |
| एति | एति (√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| मृत्स्ना | मृत्स्ना (१.१) | earth |
| कृत्स्ना | कृत्स्ना (१.१) | entire |
| अपि | अपि | even |
| सा | तद् (१.१) | that |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| रुचा | रुच् (३.१) | by the radiance |
| विजितश्रीः | विजित (वि√जि+क्त)–श्री (१.१) | whose beauty is surpassed |
| यस्याः | यद् (६.१) | of which |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| जाम्बवद्रवभवा | जाम्बव–द्रव–भवा (१.१) | originating from the juice of the Jambu fruit |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this |
| सुधाविधाम्बुः | सुधा–विध–अम्बु (१.१) | whose water is like nectar |
| जम्बूसरित् | जम्बू–सरित् (१.१) | the Jambu river |
| वहति | वहति (√वह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | flows |
| सीमनि | सीमन् (७.१) | on the border |
| कम्बुकण्ठि | कम्बुकण्ठी (८.१) | O conch-necked one |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| जा | म्बू | न | दं | ज | ग | ति | वि | श्रु | ति | मे | ति | मृ | त्स्ना | ||
| कृ | त्स्ना | पि | सा | त | व | रु | चा | वि | जि | त | श्रि | ||||
| य | स्याः | त | ज्जा | म्ब | व | द्र | व | भ | वा | स्य | सु | धा | वि | धा | म्बुः |
| ज | म्बू | स | रि | द्व | ह | ति | सी | म | नि | क | म्बु | क | ण्ठि | ||
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.