उत्सर्पिणी न किल तस्य तरिङ्गिणी या
त्वन्नेत्रयोरहह तत्र विपाशि जाता ।
नीराजनाय नवनीरजराजिरास्ताम्
अत्राञ्जसानुरज राजनि राजमाने ॥
उत्सर्पिणी न किल तस्य तरिङ्गिणी या
त्वन्नेत्रयोरहह तत्र विपाशि जाता ।
नीराजनाय नवनीरजराजिरास्ताम्
अत्राञ्जसानुरज राजनि राजमाने ॥
त्वन्नेत्रयोरहह तत्र विपाशि जाता ।
नीराजनाय नवनीरजराजिरास्ताम्
अत्राञ्जसानुरज राजनि राजमाने ॥
अन्वयः
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अहह! या तस्य उत्सर्पिणी तरङ्गिणी (अस्ति), (सा) तत्र त्वत्-नेत्रयोः विपाशि जाता किल । नव-नीरज-राजिः नीराजनाय आस्ताम् । अत्र राजमाने राजनि अञ्जसा अनुरज ।
Summary
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"Alas! The overflowing river of his fame has indeed become 'Vipashi' (unfettered, and also the river Vipasha) in your eyes. Let the row of fresh lotuses serve for his lustration ceremony. Quickly become attached to this shining king."
पदच्छेदः
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| उत्सर्पिणी | उत्सर्पिणी (उद्√सृप्, १.१) | overflowing |
| न | न | not |
| किल | किल | indeed |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| तरङ्गिणी | तरङ्गिणी (१.१) | river |
| या | यद् (१.१) | which |
| त्वत्-नेत्रयोः | त्वत्–नेत्र (७.२) | in your two eyes |
| अहह | अहह | alas! |
| तत्र | तत्र | there |
| विपाशि | विपाश् (१.१) | unfettered/the Vipasha river |
| जाता | जात (√जन्+क्त, १.१) | became |
| नीराजनाय | नीराजन (४.१) | for the lustration ceremony |
| नव-नीरज-राजिः | नव–नीरज–राजि (१.१) | a row of fresh lotuses |
| आस्ताम् | आस्ताम् (√आस् लोट् प्र.पु. एक.) | let it be |
| अत्र | अत्र | in this |
| अञ्जसा | अञ्जसा | quickly |
| अनुरज | अनुरज (अनु√रञ्ज् लोट् म.पु. एक.) | be attached to |
| राजानि | राजन् (७.१) | king |
| राजमाने | राजमान (√राज्, ७.१) | shining |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | त्स | र्पि | णी | न | कि | ल | त | स्य | त | रि | ङ्गि | णी | या |
| त्व | न्ने | त्र | यो | र | ह | ह | त | त्र | वि | पा | शि | जा | ता |
| नी | रा | ज | ना | य | न | व | नी | र | ज | रा | जि | रा | स्ता |
| म | त्रा | ञ्ज | सा | नु | र | ज | रा | ज | नि | रा | ज | मा | ने |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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