संभाषणं भगवती सदृशं विधाय
वाग्देवता विनयवन्धुरकंधरायाः ।
ऊचे चतुर्दशजगज्जनतानमस्या
तन्नाश्रिता सदसि दक्षिणपक्षमस्याः ॥
संभाषणं भगवती सदृशं विधाय
वाग्देवता विनयवन्धुरकंधरायाः ।
ऊचे चतुर्दशजगज्जनतानमस्या
तन्नाश्रिता सदसि दक्षिणपक्षमस्याः ॥
वाग्देवता विनयवन्धुरकंधरायाः ।
ऊचे चतुर्दशजगज्जनतानमस्या
तन्नाश्रिता सदसि दक्षिणपक्षमस्याः ॥
अन्वयः
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चतुर्दशजगज्जनतानमस्या भगवती वाग्देवता विनयवन्धुरकंधरायाः अस्याः सदृशं संभाषणं विधाय, सदसि तस्याः दक्षिणपक्षम् आश्रिता (सती) ऊचे ।
Summary
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The revered goddess of speech, Saraswati, worshipped by the people of the fourteen worlds, after a suitable conversation with Damayanti (whose neck was gracefully bent with modesty), took her right side in the assembly, not relying on her own divinity, and spoke.
पदच्छेदः
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| संभाषणम् | भाषण (सम्√भाषण, २.१) | conversation |
| भगवती | भगवती (१.१) | the revered |
| सदृशम् | सदृश (२.१) | suitable |
| विधाय | विधाय (वि√धा+ल्यप्) | having made |
| वाग्देवता | वाग्देवता (१.१) | the goddess of speech |
| विनय | विनय | with modesty |
| वन्धुर | वन्धुर | gracefully bent |
| कंधरायाः | कंधरा (६.१) | whose neck |
| ऊचे | ऊचे (√वच् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| चतुर्दश | चतुर्दश | fourteen |
| जगत् | जगत् | worlds |
| जनता | जनता | by the people of |
| नमस्या | नमस्य (१.१) | worshipped |
| तत् | तद् (२.१) | that (divinity) |
| न | न | not |
| आश्रिता | आश्रिता (आ√श्रि+क्त, १.१) | relying on |
| सदसि | सदस् (७.१) | in the assembly |
| दक्षिण | दक्षिण | right |
| पक्षम् | पक्ष (२.१) | side |
| अस्याः | इदम् (६.१) | of her |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सं | भा | ष | णं | भ | ग | व | ती | स | दृ | शं | वि | धा | य |
| वा | ग्दे | व | ता | वि | न | य | व | न्धु | र | कं | ध | रा | याः |
| ऊ | चे | च | तु | र्द | श | ज | ग | ज्ज | न | ता | न | म | स्या |
| त | न्ना | श्रि | ता | स | द | सि | द | क्षि | ण | प | क्ष | म | स्याः |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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