देवी पवित्रितचतुर्भुजवामभागा
वागालपत्पुनरिमां गरिमाभिरामाम् ।
अस्यारिनिष्कृपकृपाणसनाथपाणेः
पाणिग्रहादनुगृहाण गणं गुणानाम् ॥
देवी पवित्रितचतुर्भुजवामभागा
वागालपत्पुनरिमां गरिमाभिरामाम् ।
अस्यारिनिष्कृपकृपाणसनाथपाणेः
पाणिग्रहादनुगृहाण गणं गुणानाम् ॥
वागालपत्पुनरिमां गरिमाभिरामाम् ।
अस्यारिनिष्कृपकृपाणसनाथपाणेः
पाणिग्रहादनुगृहाण गणं गुणानाम् ॥
अन्वयः
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पवित्रित-चतुर्भुज-वामभागा देवी वाक् पुनः गरिमा-अभिरामाम् इमाम् आलपत् - अस्य अरि-निष्कृप-कृपाण-सनाथ-पाणेः पाणिग्रहात् गुणानाम् गणम् अनुगृहाण ।
Summary
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The goddess Vac (Saraswati), who sanctifies the left side of the four-armed Vishnu, again spoke to her (Damayanti), who was charming with dignity: "By marrying this one, whose hand holds a sword merciless to his foes, please favor the host of his virtues."
पदच्छेदः
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| देवी | देवी (१.१) | the goddess |
| पवित्रितचतुर्भुजवामभागा | पवित्रित–चतुर्भुज–वामभाग (१.१) | she who has sanctified the left side of the four-armed one (Vishnu) |
| वाक् | वाच् (१.१) | speech (Saraswati) |
| आलपत् | आलपत् (आ√लप् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spoke to |
| पुनः | पुनर् | again |
| इमाम् | इदम् (२.१) | her |
| गरिमाभिरामाम् | गरिमन्–अभिरामा (२.१) | who was charming with dignity |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this one |
| अरिनिष्कृपकृपाणसनाथपाणेः | अरि–निष्कृप–कृपाण–सनाथ–पाणि (६.१) | of him whose hand is accompanied by a sword merciless to enemies |
| पाणिग्रहात् | पाणिग्रह (५.१) | from the marriage |
| अनुगृहाण | अनुगृहाण (अनु√ग्रह् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | please favor |
| गणम् | गण (२.१) | the host |
| गुणानाम् | गुण (६.३) | of virtues |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दे | वी | प | वि | त्रि | त | च | तु | र्भु | ज | वा | म | भा | गा |
| वा | गा | ल | प | त्पु | न | रि | मां | ग | रि | मा | भि | रा | माम् |
| अ | स्या | रि | नि | ष्कृ | प | कृ | पा | ण | स | ना | थ | पा | णेः |
| पा | णि | ग्र | हा | द | नु | गृ | हा | ण | ग | णं | गु | णा | नाम् |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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