ईशः कुशेशयसनाभिशये कुशेन
द्वीपस्य लाञ्छिततनोर्यदि वाञ्छितस्ते ।
ज्योतिष्मता सममनेन वनीघनासु
तत्त्वं विनोदय घृतोदतटीषु चेतः ॥
ईशः कुशेशयसनाभिशये कुशेन
द्वीपस्य लाञ्छिततनोर्यदि वाञ्छितस्ते ।
ज्योतिष्मता सममनेन वनीघनासु
तत्त्वं विनोदय घृतोदतटीषु चेतः ॥
द्वीपस्य लाञ्छिततनोर्यदि वाञ्छितस्ते ।
ज्योतिष्मता सममनेन वनीघनासु
तत्त्वं विनोदय घृतोदतटीषु चेतः ॥
अन्वयः
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यदि कुशेन लाञ्छित-तनोः कुश-द्वीपस्य ईशः ते वाञ्छितः, तत् त्वम् ज्योतिष्मता अनेन समम् वनी-घनासु घृत-उद-तटीषु चेतः विनोदय ।
Summary
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Saraswati introduces Varuna: 'If the lord of the island whose body is marked by Kusha grass is desired by you, then delight your heart with this radiant one on the banks of the Ocean of Ghee, amidst its dense forests.'
पदच्छेदः
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| ईशः | ईश (१.१) | the lord |
| कुशेशयसनाभिशये | कुशेशय-सनाभि-शय (७.१) | (a difficult compound, likely referring to the lord of Kusha island) |
| कुशेन | कुश (३.१) | by Kusha grass |
| द्वीपस्य | द्वीप (६.१) | of the island |
| लाञ्छिततनोः | लाञ्छित-तनु (६.१) | of the one whose body is marked |
| यदि | यदि | if |
| वाञ्छितः | वाञ्छित (√वाञ्छ्+क्त, १.१) | is desired |
| ते | युष्मद् (३.१) | by you |
| ज्योतिष्मता | ज्योतिष्मत् (३.१) | with the radiant one |
| समम् | समम् | with |
| अनेन | इदम् (३.१) | this one |
| वनीघनासु | वनी-घना (७.३) | in the dense forests |
| तत् | तत् | then |
| त्वं | युष्मद् (१.१) | you |
| विनोदय | विनोदय (वि√नुद् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | delight |
| घृतोदतटीषु | घृत-उद-तटी (७.३) | on the banks of the ocean of ghee |
| चेतः | चेतस् (२.१) | mind |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ई | शः | कु | शे | श | य | स | ना | भि | श | ये | कु | शे | न |
| द्वी | प | स्य | ला | ञ्छि | त | त | नो | र्य | दि | वा | ञ्छि | त | स्ते |
| ज्यो | ति | ष्म | ता | स | म | म | ने | न | व | नी | घ | ना | सु |
| त | त्त्वं | वि | नो | द | य | घृ | तो | द | त | टी | षु | चे | तः |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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