तत्राद्रिरस्ति भवदङ्घ्रिविहारयाची
क्रौञ्चः स्फुरिष्यति गुणानिव यस्त्वदीयान् ।
हंसावली कलकलप्रतिनादवाग्भिः
स्कन्देषुवृन्दविवरैर्विवरीतुकामः ॥
तत्राद्रिरस्ति भवदङ्घ्रिविहारयाची
क्रौञ्चः स्फुरिष्यति गुणानिव यस्त्वदीयान् ।
हंसावली कलकलप्रतिनादवाग्भिः
स्कन्देषुवृन्दविवरैर्विवरीतुकामः ॥
क्रौञ्चः स्फुरिष्यति गुणानिव यस्त्वदीयान् ।
हंसावली कलकलप्रतिनादवाग्भिः
स्कन्देषुवृन्दविवरैर्विवरीतुकामः ॥
अन्वयः
AI
तत्र भवत्-अङ्घ्रि-विहार-याची क्रौञ्चः अद्रिः अस्ति । यः स्कन्द-इषु-वृन्द-विवरैः हंस-आवली-कलकल-प्रतिनाद-वाग्भिः त्वदीयान् गुणान् विवरीतु-कामः (सन्) स्फुरिष्यति इव ।
Summary
AI
There is the Krauncha mountain, which begs for the pleasure of your feet wandering upon it. It seems as if, desiring to proclaim your virtues, it will do so with words that are the echoes of the cackling of swans, emanating from the holes pierced by Skanda's arrows.
पदच्छेदः
AI
| तत्र | तत्र | there |
| अद्रिः | अद्रि (१.१) | mountain |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | is |
| भवदङ्घ्रिविहारयाची | भवत्–अङ्घ्रि–विहार–याचिन् (१.१) | requesting the stroll of your feet |
| क्रौञ्चः | क्रौञ्च (१.१) | Krauncha |
| स्फुरिष्यति | स्फुरिष्यति (√स्फुर् कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | will proclaim |
| गुणान् | गुण (२.३) | qualities |
| इव | इव | as if |
| यः | यद् (१.१) | which |
| त्वदीयान् | त्वदीय (२.३) | your |
| हंसावलीकलकलप्रतिनादवाग्भिः | हंस–आवली–कलकल–प्रतिनाद–वाच् (३.३) | with words that are echoes of the cackling of a line of swans |
| स्कन्देषुवृन्दविवरैः | स्कन्द–इषु–वृन्द–विवर (३.३) | through the holes made by the multitude of Skanda's arrows |
| विवरीतुकामः | विवरीतु-काम (१.१) | desirous of describing |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त्रा | द्रि | र | स्ति | भ | व | द | ङ्घ्रि | वि | हा | र | या | ची |
| क्रौ | ञ्चः | स्फु | रि | ष्य | ति | गु | णा | नि | व | य | स्त्व | दी | यान् |
| हं | सा | व | ली | क | ल | क | ल | प्र | ति | ना | द | वा | ग्भिः |
| स्क | न्दे | षु | वृ | न्द | वि | व | रै | र्वि | व | री | तु | का | मः |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.