एतेन ते विरहपावकमेत्य ताव-
त्कामं स्वनाम कलितान्वयमन्वभावि ।
अङ्गीकरोषि यदि तत्तव नन्दनाद्यैः
लब्धान्वयं स्वमपि नन्वयमातनोतु ॥
एतेन ते विरहपावकमेत्य ताव-
त्कामं स्वनाम कलितान्वयमन्वभावि ।
अङ्गीकरोषि यदि तत्तव नन्दनाद्यैः
लब्धान्वयं स्वमपि नन्वयमातनोतु ॥
त्कामं स्वनाम कलितान्वयमन्वभावि ।
अङ्गीकरोषि यदि तत्तव नन्दनाद्यैः
लब्धान्वयं स्वमपि नन्वयमातनोतु ॥
अन्वयः
AI
तावत् एतेन (नलेन) ते विरह-पावकम् एत्य कामम् स्व-नाम कलित-अन्वयम् अन्वभावि । यदि (त्वम् एनम्) अङ्गीकरोषि, तत् ननु अयम् तव नन्दन-आद्यैः स्वम् अपि लब्ध-अन्वयम् आतनोतु ।
Summary
AI
Saraswati speaks of Nala: By reaching the fire of your separation, Kama (the god of love) has so far been made to realize the meaning of his name ('desire'). If you accept this Nala, then surely may he also make his own name ('Nala', delighter) meaningful through sons born from you.
पदच्छेदः
AI
| एतेन | एतद् (३.१) | by this one (Nala) |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| विरहपावकम् | विरह-पावक (२.१) | the fire of separation |
| एत्य | एत्य (√इ+ल्यप्) | having reached |
| तावत् | तावत् | so far |
| कामम् | काम (१.१) | Kama (god of love) |
| स्वनाम | स्व-नाम (२.१) | his own name |
| कलितान्वयम् | कलित-अन्वय (२.१) | having its meaning realized |
| अन्वभावि | अन्वभावि (अनु√भू +णिच् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was made to experience |
| अङ्गीकरोषि | अङ्गीकरोषि (अङ्गी√कृ +च्वि कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you accept |
| यदि | यदि | if |
| तत् | तत् | then |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| नन्दनाद्यैः | नन्दन-आदि (३.३) | by sons and others |
| लब्धान्वयं | लब्ध-अन्वय (२.१) | having its meaning realized |
| स्वम् | स्व (२.१) | his own (name) |
| अपि | अपि | also |
| ननु | ननु | surely |
| अयम् | इदम् (१.१) | this one (Nala) |
| आतनोतु | आतनोतु (आ√तन् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may he make |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ते | न | ते | वि | र | ह | पा | व | क | मे | त्य | ता | व |
| त्का | मं | स्व | ना | म | क | लि | ता | न्व | य | म | न्व | भा | वि |
| अ | ङ्गी | क | रो | षि | य | दि | त | त्त | व | न | न्द | ना | द्यैः |
| ल | ब्धा | न्व | यं | स्व | म | पि | न | न्व | य | मा | त | नो | तु |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.