पृथ्वीश एष नुदतु त्वदनङ्गताप-
मालिङ्ग्य कीर्तिचयचामरचारुचापः ।
सङ्ग्रामसंगतविरोधिशिरोधिदण्ड-
खण्डिक्षुरप्रशरसंप्रसरत्प्रतापः ॥
पृथ्वीश एष नुदतु त्वदनङ्गताप-
मालिङ्ग्य कीर्तिचयचामरचारुचापः ।
सङ्ग्रामसंगतविरोधिशिरोधिदण्ड-
खण्डिक्षुरप्रशरसंप्रसरत्प्रतापः ॥
मालिङ्ग्य कीर्तिचयचामरचारुचापः ।
सङ्ग्रामसंगतविरोधिशिरोधिदण्ड-
खण्डिक्षुरप्रशरसंप्रसरत्प्रतापः ॥
अन्वयः
AI
कीर्ति-चय-चामर-चारु-चापः सङ्ग्राम-संगत-विरोधि-शिरोधि-दण्ड-खण्डी-क्षुरप्र-शर-संप्रसरत्-प्रतापः एषः पृथ्वीशः आलिङ्ग्य त्वत्-अनङ्ग-तापम् नुदतु ।
Summary
AI
May this king, whose beautiful bow is like a chowrie made of his fame, and whose spreading valor is like a shower of sharp arrows cutting the necks of enemies in battle, dispel the fever of your love by embracing you.
पदच्छेदः
AI
| पृथ्वीशः | पृथ्वी–ईश (१.१) | this lord of the earth |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| नुदतु | नुदतु (√नुद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may he dispel |
| त्वत् | युष्मद् | your |
| अनङ्ग | अनङ्ग | love's |
| तापम् | ताप (२.१) | fever |
| आलिङ्ग्य | आलिङ्ग्य (आ√लिङ्ग्+ल्यप्) | by embracing |
| कीर्ति | कीर्ति | fame |
| चय | चय | mass |
| चामर | चामर | like a chowrie |
| चारु | चारु | beautiful |
| चापः | चाप (१.१) | whose bow |
| सङ्ग्राम | सङ्ग्राम | in battle |
| संगत | संगत (सम्√गम्+क्त) | encountered |
| विरोधि | विरोधिन् | enemies' |
| शिरोधि | शिरोधि | necks |
| दण्ड | दण्ड | staff-like |
| खण्डी | खण्डी | cutting |
| क्षुरप्र | क्षुरप्र | razor-headed |
| शर | शर | arrows |
| संप्रसरत् | संप्रसरत् (सम्+प्र√सृ+शतृ) | spreading |
| प्रतापः | प्रताप (१.१) | whose prowess |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पृ | थ्वी | श | ए | ष | नु | द | तु | त्व | द | न | ङ्ग | ता | प |
| मा | लि | ङ्ग्य | की | र्ति | च | य | चा | म | र | चा | रु | चा | पः |
| स | ङ्ग्रा | म | सं | ग | त | वि | रो | धि | शि | रो | धि | द | ण्ड |
| ख | ण्डि | क्षु | र | प्र | श | र | सं | प्र | स | र | त्प्र | ता | पः |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.