सायुज्यमृच्छति भवस्य भवाब्धियाद-
स्तां पत्युरेत्य नगरीं नगराजपुत्र्याः ।
भूताभिधानपटुमद्यतनीमवाप्य
भीमोद्भवे भवतिभावमिवास्तिधातुः ॥
सायुज्यमृच्छति भवस्य भवाब्धियाद-
स्तां पत्युरेत्य नगरीं नगराजपुत्र्याः ।
भूताभिधानपटुमद्यतनीमवाप्य
भीमोद्भवे भवतिभावमिवास्तिधातुः ॥
स्तां पत्युरेत्य नगरीं नगराजपुत्र्याः ।
भूताभिधानपटुमद्यतनीमवाप्य
भीमोद्भवे भवतिभावमिवास्तिधातुः ॥
अन्वयः
AI
भीमोद्भवे! नगराजपुत्र्याः पत्युः (भवस्य) ताम् नगरीम् एत्य, भवाब्धियादः भवस्य सायुज्यम् ऋच्छति, (यथा) अस्तिधातुः भूताभिधानपटुम् (रूपम् त्यक्त्वा) अद्यतनीम् (वृत्तिम्) अवाप्य भवतिभावम् (ऋच्छति) इव ।
Summary
AI
O daughter of Bhima! A creature in the ocean of existence, upon reaching that city of Parvati's husband (Shiva), attains union with Shiva himself. This is like the verbal root 'as' (to be), which, though adept at expressing the past tense (āsīt), attains the sense of the present tense 'bhavati' (is/becomes).
पदच्छेदः
AI
| सायुज्यम् | सायुज्य (२.१) | union |
| ऋच्छति | ऋच्छति (√ऋ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| भवस्य | भव (६.१) | of Shiva |
| भवाब्धियादः | भव–अब्धि–यादस् (१.१) | a creature in the ocean of existence |
| ताम् | तद् (२.१) | that |
| पत्युः | पति (६.१) | of the husband |
| एत्य | एत्य (आ√इ+ल्यप्) | having reached |
| नगरीम् | नगरी (२.१) | city |
| नगराजपुत्र्याः | नगराज–पुत्री (६.१) | of Parvati (daughter of the mountain king) |
| भूताभिधानपटुम् | भूत–अभिधान–पटु (२.१) | adept at expressing the past tense |
| अद्यतनीम् | अद्यतनी (२.१) | the present tense (form) |
| अवाप्य | अवाप्य (अव√आप्+ल्यप्) | having obtained |
| भीमोद्भवे | भीम–उद्भवा (८.१) | O daughter of Bhima |
| भवतिभावम् | भवति–भाव (२.१) | the sense of 'bhavati' (is/becomes) |
| इव | इव | like |
| अस्तिधातुः | अस्–धातु (१.१) | the verbal root 'as' (to be) |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | यु | ज्य | मृ | च्छ | ति | भ | व | स्य | भ | वा | ब्धि | या | द |
| स्तां | प | त्यु | रे | त्य | न | ग | रीं | न | ग | रा | ज | पु | त्र्याः |
| भू | ता | भि | धा | न | प | टु | म | द्य | त | नी | म | वा | प्य |
| भी | मो | द्भ | वे | भ | व | ति | भा | व | मि | वा | स्ति | धा | तुः |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.