तज्जः श्रमाम्बु सुरतान्तमुदा नितान्त-
मुत्कण्टके स्तनतटे तव संचरिष्णुः ।
खञ्जन्प्रभञ्जनजनः पथिकः पिपासुः
पाता कुरङ्गमदपङ्किलमप्यशङ्कम् ॥
तज्जः श्रमाम्बु सुरतान्तमुदा नितान्त-
मुत्कण्टके स्तनतटे तव संचरिष्णुः ।
खञ्जन्प्रभञ्जनजनः पथिकः पिपासुः
पाता कुरङ्गमदपङ्किलमप्यशङ्कम् ॥
मुत्कण्टके स्तनतटे तव संचरिष्णुः ।
खञ्जन्प्रभञ्जनजनः पथिकः पिपासुः
पाता कुरङ्गमदपङ्किलमप्यशङ्कम् ॥
अन्वयः
AI
सुरतान्तमुदा तव नितान्तम् उत्कण्टके स्तनतटे संचरिष्णुः तज्जः श्रमाम्बु, खञ्जन् प्रभञ्जनजनः पथिकः पिपासुः (सन्) कुरङ्गमदपङ्किलम् अपि अशङ्कम् पाता ।
Summary
AI
The sweat born from the joy at the end of lovemaking, moving on your breast which is horripilated with extreme pleasure, will be drunk without hesitation by the thirsty traveler, the gentle breeze, even though it is muddy with musk paste.
पदच्छेदः
AI
| तज्जः | तद्–ज (१.१) | born from that (lovemaking) |
| श्रमाम्बु | श्रम–अम्बु (१.१) | the water of exertion (sweat) |
| सुरतान्तमुदा | सुरत–अन्त–मुद् (३.१) | with the joy at the end of lovemaking |
| नितान्तम् | नितान्तम् | extremely |
| उत्कण्टके | उत्कण्टक (७.१) | on the horripilated |
| स्तनतटे | स्तन–तट (७.१) | on the surface of the breast |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| संचरिष्णुः | संचरिष्णु (सम्√चर्+इष्णुच्, १.१) | moving |
| खञ्जन्प्रभञ्जनजनः | खञ्जन् (√खञ्ज्+शतृ)–प्रभञ्जन–जन (१.१) | the person of the gentle breeze |
| पथिकः | पथिक (१.१) | traveler |
| पिपासुः | पिपासु (√पा+सन्+उ, १.१) | thirsty |
| पाता | पातृ (√पा+तृच्, १.१) | will drink |
| कुरङ्गमदपङ्किलम् | कुरङ्गमद–पङ्किल (२.१) | muddy with musk paste |
| अपि | अपि | even |
| अशङ्कम् | अशङ्कम् | without hesitation |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | ज्जः | श्र | मा | म्बु | सु | र | ता | न्त | मु | दा | नि | ता | न्त |
| मु | त्क | ण्ट | के | स्त | न | त | टे | त | व | सं | च | रि | ष्णुः |
| ख | ञ्ज | न्प्र | भ | ञ्ज | न | ज | नः | प | थि | कः | पि | पा | सुः |
| पा | ता | कु | र | ङ्ग | म | द | प | ङ्कि | ल | म | प्य | श | ङ्कम् |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.