आश्चर्यमस्य ककुभामवधीनवाप-
दाजानुगाद्भुजयुगादुदितः प्रतापः ।
व्यापत्सदाशयविसारितसप्ततन्तु-
जन्मा चतुर्दश जगन्ति यशःपटश्च ॥
आश्चर्यमस्य ककुभामवधीनवाप-
दाजानुगाद्भुजयुगादुदितः प्रतापः ।
व्यापत्सदाशयविसारितसप्ततन्तु-
जन्मा चतुर्दश जगन्ति यशःपटश्च ॥
दाजानुगाद्भुजयुगादुदितः प्रतापः ।
व्यापत्सदाशयविसारितसप्ततन्तु-
जन्मा चतुर्दश जगन्ति यशःपटश्च ॥
अन्वयः
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आश्चर्यम् ! अस्य आजानुगात् भुजयुगात् उदितः प्रतापः ककुभाम् अवधीन् अवापत् । सदाशयविसारितसप्ततन्तुजन्मा यशःपटः च चतुर्दश जगन्ति व्यापत् ।
Summary
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It is a wonder! The prowess that arose from his pair of arms reaching down to his knees reached the very limits of all directions. And the canopy of his fame, born from sacrifices performed with noble intentions, pervaded all fourteen worlds.
पदच्छेदः
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| आश्चर्यम् | आश्चर्य (१.१) | a wonder |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| ककुभाम् | ककुभ् (६.३) | of the directions |
| अवधीन् | अवधि (२.३) | the limits |
| अवापत् | अवापत् (अव√आप् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | reached |
| आजानुगात् | आजानुग (५.१) | from the one reaching the knees |
| भुजयुगात् | भुज–युग (५.१) | from the pair of arms |
| उदितः | उदित (उद्√इ+क्त, १.१) | risen |
| प्रतापः | प्रताप (१.१) | prowess |
| व्यापत् | व्यापत् (वि√आप् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | pervaded |
| सदाशयविसारितसप्ततन्तुजन्मा | सदाशय–विसारित–सप्ततन्तु–जन्मन् (१.१) | born from the seven-stranded sacrifices spread with good intentions |
| चतुर्दश | चतुर्दशन् (२.३) | fourteen |
| जगन्ति | जगत् (२.३) | worlds |
| यशःपटः | यशस्–पट (१.१) | the canopy of fame |
| च | च | and |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | श्च | र्य | म | स्य | क | कु | भा | म | व | धी | न | वा | प |
| दा | जा | नु | गा | द्भु | ज | यु | गा | दु | दि | तः | प्र | ता | पः |
| व्या | प | त्स | दा | श | य | वि | सा | रि | त | स | प्त | त | न्तु |
| ज | न्मा | च | तु | र्द | श | ज | ग | न्ति | य | शः | प | ट | श्च |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
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