भीमस्तयागद्यत मोदितुं ते
वेला किलेयं तदलं विषद्य ।
मया निगाद्यं जगतीपतीनां
गोत्रं चरित्रं च विचित्रमेषाम् ॥
भीमस्तयागद्यत मोदितुं ते
वेला किलेयं तदलं विषद्य ।
मया निगाद्यं जगतीपतीनां
गोत्रं चरित्रं च विचित्रमेषाम् ॥
वेला किलेयं तदलं विषद्य ।
मया निगाद्यं जगतीपतीनां
गोत्रं चरित्रं च विचित्रमेषाम् ॥
अन्वयः
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तया भीमः अगद्यत - ते मोदितुम् इयम् वेला किल । तत् विषद्य अलम् । मया एषाम् जगती-पतीनाम् विचित्रम् गोत्रम् चरित्रम् च निगाद्यम् ।
Summary
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She (Sarasvati) then spoke to Bhima: "This is indeed the time for you to rejoice, so enough with despair. I must now announce the wondrous lineage and deeds of these assembled kings."
पदच्छेदः
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| भीमः | भीम (१.१) | Bhima |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| अगद्यत | अगद्यत (√गद् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was spoken to |
| मोदितुं | मोदितुम् (√मुद्+तुमुन्) | to rejoice |
| ते | युष्मद् (४.१) | for you |
| वेला | वेला (१.१) | time |
| किल | किल | indeed |
| इयं | इदम् (१.१) | this |
| तत् | तत् | therefore |
| अलं | अलम् | enough |
| विषद्य | विषद्य (वि√सद्+ल्यप्) | having despaired |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| निगाद्यं | निगाद्य (नि√गद्+यत्, १.१) | to be spoken |
| जगतीपतीनां | जगतीपति (६.३) | of the kings |
| गोत्रं | गोत्र (२.१) | lineage |
| चरित्रं | चरित्र (२.१) | deeds |
| च | च | and |
| विचित्रम् | विचित्र (२.१) | wondrous |
| एषाम् | एतद् (६.३) | of these |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भी | म | स्त | या | ग | द्य | त | मो | दि | तुं | ते |
| वे | ला | कि | ले | यं | त | द | लं | वि | ष | द्य |
| म | या | नि | गा | द्यं | ज | ग | ती | प | ती | नां |
| गो | त्रं | च | रि | त्रं | च | वि | चि | त्र | मे | षाम् |
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