आकल्पविच्छेदविवर्जितो यः
स धर्मशास्त्रव्रज एव यस्याः ।
पश्यामि मूर्धा श्रुतिमूलशाली
कण्ठस्थितः कस्य मुदे न वृत्तः ॥
आकल्पविच्छेदविवर्जितो यः
स धर्मशास्त्रव्रज एव यस्याः ।
पश्यामि मूर्धा श्रुतिमूलशाली
कण्ठस्थितः कस्य मुदे न वृत्तः ॥
स धर्मशास्त्रव्रज एव यस्याः ।
पश्यामि मूर्धा श्रुतिमूलशाली
कण्ठस्थितः कस्य मुदे न वृत्तः ॥
अन्वयः
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यस्याः यः आकल्प-विच्छेद-विवर्जितः श्रुति-मूल-शाली मूर्धा (अस्ति), सः धर्म-शास्त्र-व्रजः एव (इति पश्यामि) । कण्ठ-स्थितः (सः) कस्य मुदे न वृत्तः?
Summary
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I see that her hair, which is uninterrupted and rooted at her ears (śruti-mūla), is indeed the collection of Dharmaśāstras, which are eternal and rooted in the Vedas (śruti). Residing on her neck, for whose delight has it not become?
पदच्छेदः
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| आकल्पविच्छेदविवर्जितः | आकल्प–विच्छेद–विवर्जित (१.१) | devoid of interruption until the end of the kalpa |
| यः | यद् (१.१) | which |
| सः | तद् (१.१) | that |
| धर्मशास्त्रव्रजः | धर्मशास्त्र–व्रज (१.१) | the collection of Dharmaśāstras |
| एव | एव | indeed |
| यस्याः | यद् (६.१) | whose |
| पश्यामि | पश्यामि (√दृश् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I see |
| मूर्धा | मूर्धन् (१.१) | the head/hair |
| श्रुतिमूलशाली | श्रुति–मूल–शालिन् (१.१) | originating from the Śruti / rooted at the ears |
| कण्ठस्थितः | कण्ठ–स्थित (√स्था+क्त, १.१) | residing on the neck |
| कस्य | किम् (६.१) | for whom |
| मुदे | मुद् (४.१) | for joy |
| न | न | not |
| वृत्तः | वृत्त (√वृत्+क्त, १.१) | has become |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | क | ल्प | वि | च्छे | द | वि | व | र्जि | तो | यः |
| स | ध | र्म | शा | स्त्र | व्र | ज | ए | व | य | स्याः |
| प | श्या | मि | मू | र्धा | श्रु | ति | मू | ल | शा | ली |
| क | ण्ठ | स्थि | तः | क | स्य | मु | दे | न | वृ | त्तः |
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