ब्रह्मार्थकर्मार्थकवेदभेदा
द्विधा विधाय स्थितयात्मदेहम् ।
चक्रे पराच्छादनचारु यस्या
मीमांसया मांसलमूरुयुग्मम् ॥
ब्रह्मार्थकर्मार्थकवेदभेदा
द्विधा विधाय स्थितयात्मदेहम् ।
चक्रे पराच्छादनचारु यस्या
मीमांसया मांसलमूरुयुग्मम् ॥
द्विधा विधाय स्थितयात्मदेहम् ।
चक्रे पराच्छादनचारु यस्या
मीमांसया मांसलमूरुयुग्मम् ॥
अन्वयः
AI
यस्याः ऊरुयुग्मम्, ब्रह्म-अर्थ-कर्म-अर्थक-वेद-भेदात् द्विधा आत्म-देहम् विधाय स्थितया मीमांसया, पर-आच्छादन-चारु मांसलम् चक्रे ।
Summary
AI
Her plump pair of thighs, beautiful in their concealment, was fashioned by the Mīmāṃsā philosophy, which itself is established by dividing its own body (the Veda) into two parts based on their subject matter: Brahman (knowledge) and Karma (rituals).
पदच्छेदः
AI
| ब्रह्मार्थ | ब्रह्मन्–अर्थ | meaning of Brahman |
| कर्मार्थक | कर्मन्–अर्थक | meaning of Karma |
| वेदभेदात् | वेद–भेद (५.१) | from the division of the Veda |
| द्विधा | द्विधा | in two ways |
| विधाय | विधाय (वि√धा+ल्यप्) | having divided |
| स्थितया | स्थित (√स्था+क्त, ३.१) | by the established |
| आत्मदेहम् | आत्मन्–देह (२.१) | its own body |
| चक्रे | चक्रे (√कृ भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was made |
| पराच्छादनचारु | पर–आच्छादन–चारु (२.१) | beautiful in covering |
| यस्याः | यद् (६.१) | whose |
| मीमांसया | मीमांसा (३.१) | by the Mīmāṃsā philosophy |
| मांसलम् | मांसल (२.१) | plump |
| ऊरुयुग्मम् | ऊरु–युग्म (२.१) | pair of thighs |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब्र | ह्मा | र्थ | क | र्मा | र्थ | क | वे | द | भे | दा |
| द्वि | धा | वि | धा | य | स्थि | त | या | त्म | दे | हम् |
| च | क्रे | प | रा | च्छा | द | न | चा | रु | य | स्या |
| मी | मां | स | या | मां | स | ल | मू | रु | यु | ग्मम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.