तच्चिन्तनानन्तरमेव देवः
सरस्वतीं सस्मितमाह स स्म ।
स्वयंवरे राजकगोत्रवृत्त-
वत्त्रीमिह त्वां करवाणि वाणि ॥
तच्चिन्तनानन्तरमेव देवः
सरस्वतीं सस्मितमाह स स्म ।
स्वयंवरे राजकगोत्रवृत्त-
वत्त्रीमिह त्वां करवाणि वाणि ॥
सरस्वतीं सस्मितमाह स स्म ।
स्वयंवरे राजकगोत्रवृत्त-
वत्त्रीमिह त्वां करवाणि वाणि ॥
अन्वयः
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तत्-चिन्तन-अनन्तरम् एव सः देवः सरस्वतीम् सस्मितम् आह स्म । 'वाणि, इह स्वयंवरे त्वाम् राजक-गोत्र-वृत्त-वक्त्रीम् करवाणि' ।
Summary
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Immediately after King Bhima's thought, the god Vishnu smiled and spoke to the goddess Sarasvati: 'O Vani, let me appoint you here in this Svayamvara to be the one who describes the lineage and character of all the assembled kings.'
पदच्छेदः
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| तच्चिन्तनानन्तरम् | तद्–चिन्तन–अनन्तरम् | immediately after that thought |
| एव | एव | just |
| देवः | देव (१.१) | the god |
| सरस्वतीम् | सरस्वती (२.१) | to Sarasvati |
| सस्मितम् | सस्मितम् | with a smile |
| आह | आह (√अह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| सः | तद् (१.१) | he |
| स्म | स्म | (past tense marker) |
| स्वयंवरे | स्वयंवर (७.१) | in the Svayamvara |
| राजकगोत्रवृत्तवत्त्रीम् | राजक–गोत्र–वृत्त–वक्त्री (२.१) | the narrator of the lineage and character of the kings |
| इह | इह | here |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | you |
| करवाणि | करवाणि (√कृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | let me make |
| वाणि | वाणि (८.१) | O Vani (Sarasvati) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | च्चि | न्त | ना | न | न्त | र | मे | व | दे | वः |
| स | र | स्व | तीं | स | स्मि | त | मा | ह | स | स्म |
| स्व | यं | व | रे | रा | ज | क | गो | त्र | वृ | त्त |
| व | त्त्री | मि | ह | त्वां | क | र | वा | णि | वा | णि |
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