स्थितैरियद्भिर्युवभिर्विदग्धै-
र्दग्धेऽपि कामे जगतः क्षतिः का ।
एकाम्बुबिन्दुव्ययमम्बुराशेः
पूर्णस्य कः शंसति शोषदोषम् ॥
स्थितैरियद्भिर्युवभिर्विदग्धै-
र्दग्धेऽपि कामे जगतः क्षतिः का ।
एकाम्बुबिन्दुव्ययमम्बुराशेः
पूर्णस्य कः शंसति शोषदोषम् ॥
र्दग्धेऽपि कामे जगतः क्षतिः का ।
एकाम्बुबिन्दुव्ययमम्बुराशेः
पूर्णस्य कः शंसति शोषदोषम् ॥
अन्वयः
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इयद्भिः विदग्धैः युवभिः स्थितैः, कामे दग्धे अपि जगतः का क्षतिः? पूर्णस्य अम्बु-राशेः एक-अम्बु-बिन्दु-व्ययम् कः शोष-दोषम् शंसति?
Summary
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With so many handsome and skilled youths present, what loss is it to the world that Kamadeva was once burned to ashes? It is like the full ocean; who would claim it is drying up due to the loss of a single drop of water?
पदच्छेदः
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| स्थितैः | स्थित (√स्था+क्त, ३.३) | with (them) being present |
| इयद्भिः | इयत् (३.३) | with so many |
| युवभिः | युवन् (३.३) | with youths |
| विदग्धैः | विदग्ध (वि√दह्+क्त, ३.३) | handsome/clever |
| दग्धे | दग्ध (√दह्+क्त, ७.१) | having been burnt |
| अपि | अपि | even |
| कामे | काम (७.१) | Kamadeva |
| जगतः | जगत् (६.१) | of the world |
| क्षतिः | क्षति (१.१) | loss |
| का | किम् (१.१) | what? |
| एकाम्बुबिन्दुव्ययम् | एक–अम्बु–बिन्दु–व्यय (२.१) | the loss of a single drop of water |
| अम्बुराशेः | अम्बु–राशि (६.१) | of the ocean |
| पूर्णस्य | पूर्ण (√पॄ+क्त, ६.१) | full |
| कः | किम् (१.१) | who? |
| शंसति | शंसति (√शंस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | mentions |
| शोषदोषम् | शोष–दोष (२.१) | the fault of drying up |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्थि | तै | रि | य | द्भि | र्यु | व | भि | र्वि | द | ग्धै |
| र्द | ग्धे | ऽपि | का | मे | ज | ग | तः | क्ष | तिः | का |
| ए | का | म्बु | बि | न्दु | व्य | य | म | म्बु | रा | शेः |
| पू | र्ण | स्य | कः | शं | स | ति | शो | ष | दो | षम् |
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