प्रवेक्ष्यतः सुन्दरवृन्दमुच्चै-
रिदं मुदा चेदितरेतरं तत् ।
न शक्ष्यतो लक्षयितुं विमिश्रं
दस्रौ सहस्रैरपि वत्सराणाम् ॥
प्रवेक्ष्यतः सुन्दरवृन्दमुच्चै-
रिदं मुदा चेदितरेतरं तत् ।
न शक्ष्यतो लक्षयितुं विमिश्रं
दस्रौ सहस्रैरपि वत्सराणाम् ॥
रिदं मुदा चेदितरेतरं तत् ।
न शक्ष्यतो लक्षयितुं विमिश्रं
दस्रौ सहस्रैरपि वत्सराणाम् ॥
अन्वयः
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चेत् दस्रौ मुदा उच्चैः इदम् सुन्दर-वृन्दम् इतरेतरम् प्रवेक्ष्यतः, तत् विमिश्रम् (आत्मानम्) वत्सराणाम् सहस्रैः अपि लक्षयितुम् न शक्ष्यतः ।
Summary
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If the two divine Ashvins, renowned for their beauty, were to joyfully enter and mingle with this great assembly of handsome princes, they would be unable to identify themselves from the others, even after thousands of years.
पदच्छेदः
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| प्रवेक्ष्यतः | प्रवेक्ष्यतः (प्र√विश् कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | they two will enter |
| सुन्दरवृन्दम् | सुन्दर–वृन्द (२.१) | the assembly of handsome men |
| उच्चैः | उच्चैस् | great |
| इदम् | इदम् (२.१) | this |
| मुदा | मुद् (३.१) | with joy |
| चेत् | चेत् | if |
| इतरेतरम् | इतरेतरम् | each other (mingle) |
| तत् | तद् | then |
| न | न | not |
| शक्ष्यतः | शक्ष्यतः (√शक् कर्तरि लृट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | they two will be able |
| लक्षयितुम् | लक्षयितुम् (√लक्ष्+तुमुन्) | to distinguish |
| विमिश्रम् | विमिश्र (वि√मिश्र्+क्त, २.१) | themselves, having mingled |
| दस्रौ | दस्र (१.२) | the two Ashvins |
| सहस्रैः | सहस्र (३.३) | by thousands |
| अपि | अपि | even |
| वत्सराणाम् | वत्सर (६.३) | of years |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | वे | क्ष्य | तः | सु | न्द | र | वृ | न्द | मु | च्चै |
| रि | दं | मु | दा | चे | दि | त | रे | त | रं | तत् |
| न | श | क्ष्य | तो | ल | क्ष | यि | तुं | वि | मि | श्रं |
| द | स्रौ | स | ह | स्रै | र | पि | व | त्स | रा | णाम् |
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