एकेन पर्यक्षिपदात्मनाद्रिं
चक्षुर्मुरारेरभवत्परेण ।
तैर्द्वादशात्मा दशभिस्तु शेषै-
र्दिशो दशालोकत लोकपूर्णाः ॥
एकेन पर्यक्षिपदात्मनाद्रिं
चक्षुर्मुरारेरभवत्परेण ।
तैर्द्वादशात्मा दशभिस्तु शेषै-
र्दिशो दशालोकत लोकपूर्णाः ॥
चक्षुर्मुरारेरभवत्परेण ।
तैर्द्वादशात्मा दशभिस्तु शेषै-
र्दिशो दशालोकत लोकपूर्णाः ॥
अन्वयः
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मुरारेः चक्षुः एकेन आत्मना अद्रिम् पर्यक्षिपत्, परेण (आत्मना) अभवत् । द्वादश-आत्मा (सः) तु शेषैः दशभिः तैः (चक्षुर्भिश्च) लोक-पूर्णाः दश दिशः आलोकयत् ।
Summary
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The eye of Murari (the Sun), with one part, encircled the mountain (Meru), and with another, it became the sun itself. The twelve-aspected one, with its remaining ten parts, then illuminated the ten directions filled with people.
पदच्छेदः
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| एकेन | एक (३.१) | with one |
| पर्यक्षिपत् | पर्यक्षिपत् (परि√क्षिप् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | encircled |
| आत्मना | आत्मन् (३.१) | part (ray) |
| अद्रिम् | अद्रि (२.१) | the mountain (Meru) |
| चक्षुः | चक्षुस् (१.१) | the eye |
| मुरारेः | मुरारि (६.१) | of Murari (the Sun) |
| अभवत् | अभवत् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| परेण | पर (३.१) | with another |
| तैः | तद् (३.३) | with those |
| द्वादशात्मा | द्वादश–आत्मन् (१.१) | the twelve-aspected one (Sun) |
| दशभिः | दशन् (३.३) | ten |
| तु | तु | and |
| शेषैः | शेष (३.३) | remaining |
| दिशः | दिश् (२.३) | directions |
| दश | दशन् (२.३) | ten |
| आलोकत | आलोकत (आ√लोक् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | illuminated |
| लोकपूर्णाः | लोक–पूर्ण (२.३) | filled with people |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | के | न | प | र्य | क्षि | प | दा | त्म | ना | द्रिं |
| च | क्षु | र्मु | रा | रे | र | भ | व | त्प | रे | ण |
| तै | र्द्वा | द | शा | त्मा | द | श | भि | स्तु | शे | षै |
| र्दि | शो | द | शा | लो | क | त | लो | क | पू | र्णाः |
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