असाम यन्नाम तवेह रूपं
स्वेनाधिगत्य श्रितमुग्धभावाः ।
तन्नो धिगाशापतितान्नरेन्द्र
धिक्चेदमस्मद्विबुधत्वमस्तु ॥
असाम यन्नाम तवेह रूपं
स्वेनाधिगत्य श्रितमुग्धभावाः ।
तन्नो धिगाशापतितान्नरेन्द्र
धिक्चेदमस्मद्विबुधत्वमस्तु ॥
स्वेनाधिगत्य श्रितमुग्धभावाः ।
तन्नो धिगाशापतितान्नरेन्द्र
धिक्चेदमस्मद्विबुधत्वमस्तु ॥
अन्वयः
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नरेन्द्र! यत् नाम तव इह रूपम् स्वेन अधिगत्य (वयम्) श्रित-मुग्ध-भावाः असाम, तत् आशा-पतितान् नः धिक् । इदम् अस्मत्-विबुधत्वम् च धिक् अस्तु ।
Summary
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"O king of men! Since we, having assumed your form here, have become infatuated ourselves, fie upon us who have fallen into this desire! And fie upon this godhood of ours!"
पदच्छेदः
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| असाम | असाम (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) उ.पु. बहु.) | we were |
| यत् | यद् (१.१) | since |
| नाम | नाम | indeed |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| इह | इह | here |
| रूपम् | रूप (२.१) | form |
| स्वेन | स्व (३.१) | by our own will |
| अधिगत्य | अधिगत्य (अधि√गम्+ल्यप्) | having obtained |
| श्रितमुग्धभावाः | श्रित–मुग्ध–भाव (१.३) | who have attained a state of infatuation |
| तत् | तद् | therefore |
| नः | अस्मद् (२.३) | us |
| धिक् | धिक् | fie upon |
| आशापतितान् | आशा–पतित (२.३) | who have fallen into desire |
| नरेन्द्र | नरेन्द्र (८.१) | O king of men |
| धिक् | धिक् | fie upon |
| च | च | and |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| अस्मद्विबुधत्वम् | अस्मद्–विबुधत्व (१.१) | our godhood |
| अस्तु | अस्तु (√अस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it be |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | सा | म | य | न्ना | म | त | वे | ह | रू | पं |
| स्वे | ना | धि | ग | त्य | श्रि | त | मु | ग्ध | भा | वाः |
| त | न्नो | धि | गा | शा | प | ति | ता | न्न | रे | न्द्र |
| धि | क्चे | द | म | स्म | द्वि | बु | ध | त्व | म | स्तु |
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