तेभ्यः परान्नः परिकल्पयस्व
श्रिया विदूरीकृतकामदेवान् ।
अस्मिन्समाजे बहुषु भ्रमन्ती
भैमी किलास्मासु घटिष्यतेऽसौ ॥
तेभ्यः परान्नः परिकल्पयस्व
श्रिया विदूरीकृतकामदेवान् ।
अस्मिन्समाजे बहुषु भ्रमन्ती
भैमी किलास्मासु घटिष्यतेऽसौ ॥
श्रिया विदूरीकृतकामदेवान् ।
अस्मिन्समाजे बहुषु भ्रमन्ती
भैमी किलास्मासु घटिष्यतेऽसौ ॥
अन्वयः
AI
श्रिया विदूरीकृत-कामदेवान् नः तेभ्यः परान् परिकल्पयस्व । अस्मिन् समाजे बहुषु भ्रमन्ती असौ भैमी किल अस्मासु घटिष्यते ।
Summary
AI
"Consider us superior to them (the other kings), for our splendor surpasses even that of Kamadeva. Indeed, that Damayanti, while wandering among the many in this assembly, will surely unite with one of us."
पदच्छेदः
AI
| तेभ्यः | तद् (५.३) | than them |
| परान् | पर (२.३) | superior |
| नः | अस्मद् (२.३) | us |
| परिकल्पयस्व | परिकल्पयस्व (परि√कॢप् +णिच् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | consider |
| श्रिया | श्री (३.१) | by splendor |
| विदूरीकृतकामदेवान् | विदूरीकृत–कामदेव (२.३) | who have surpassed Kamadeva |
| अस्मिन् | इदम् (७.१) | in this |
| समाजे | समाज (७.१) | assembly |
| बहुषु | बहु (७.३) | among many |
| भ्रमन्ती | भ्रमन्ती (√भ्रम्+शतृ, १.१) | wandering |
| भैमी | भैमी (१.१) | Damayanti |
| किल | किल | indeed |
| अस्मासु | अस्मद् (७.३) | with us |
| घटिष्यते | घटिष्यते (√घट् कर्तरि लृट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | will be united |
| असौ | अदस् (१.१) | she |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | भ्यः | प | रा | न्नः | प | रि | क | ल्प | य | स्व |
| श्रि | या | वि | दू | री | कृ | त | का | म | दे | वान् |
| अ | स्मि | न्स | मा | जे | ब | हु | षु | भ्र | म | न्ती |
| भै | मी | कि | ला | स्मा | सु | घ | टि | ष्य | ते | ऽसौ |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.