गुणेन केनापि जनेऽनवद्ये
दोषान्तरोक्तिः खलु तत्खलत्वम् ।
रूपेण तत्संसददूषितस्य
सुरैर्नरत्वं यददूषि तस्य ॥
गुणेन केनापि जनेऽनवद्ये
दोषान्तरोक्तिः खलु तत्खलत्वम् ।
रूपेण तत्संसददूषितस्य
सुरैर्नरत्वं यददूषि तस्य ॥
दोषान्तरोक्तिः खलु तत्खलत्वम् ।
रूपेण तत्संसददूषितस्य
सुरैर्नरत्वं यददूषि तस्य ॥
अन्वयः
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अनवद्ये जने केन अपि गुणेन (सति) दोष-अन्तर-उक्तिः खलु तत् खलत्वम् । यत् सुरैः रूपेण तत्-संसद्-अदूषितस्य तस्य नरत्वम् अदूषि (तत् खलत्वम्) ।
Summary
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To attribute a different fault to a blameless person due to some virtue is indeed wickedness. Such was the wickedness of the gods who, unable to find fault with his beauty in that assembly, criticized his mortality.
पदच्छेदः
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| गुणेन | गुण (३.१) | by a quality |
| केन | किम् (३.१) | some |
| अपि | अपि | even |
| जने | जन (७.१) | in a person |
| अनवद्ये | अनवद्य (७.१) | blameless |
| दोषान्तरोक्तिः | दोष–अन्तर–उक्ति (१.१) | the utterance of another fault |
| खलु | खलु | indeed |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| खलत्वम् | खलत्व (१.१) | wickedness |
| रूपेण | रूप (३.१) | by beauty |
| तत्संसददूषितस्य | तत्–संसद्–अदूषित (६.१) | of him who was unblemished in that assembly |
| सुरैः | सुर (३.३) | by the gods |
| नरत्वम् | नरत्व (२.१) | mortality |
| यत् | यद् (१.१) | that |
| अदूषि | अदूषि (√दूष् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was faulted |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| गु | णे | न | के | ना | पि | ज | ने | ऽन | व | द्ये |
| दो | षा | न्त | रो | क्तिः | ख | लु | त | त्ख | ल | त्वम् |
| रू | पे | ण | त | त्सं | स | द | दू | षि | त | स्य |
| सु | रै | र्न | र | त्वं | य | द | दू | षि | त | स्य |
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