आद्यं विधोर्जन्म स एष भूमौ
द्वैतं युवासौ रतिवल्लभस्य ।
नासत्ययोर्मूर्तितृतीयताय-
मिति स्तुतस्तैः कृतमत्सरैः सः ॥
आद्यं विधोर्जन्म स एष भूमौ
द्वैतं युवासौ रतिवल्लभस्य ।
नासत्ययोर्मूर्तितृतीयताय-
मिति स्तुतस्तैः कृतमत्सरैः सः ॥
द्वैतं युवासौ रतिवल्लभस्य ।
नासत्ययोर्मूर्तितृतीयताय-
मिति स्तुतस्तैः कृतमत्सरैः सः ॥
अन्वयः
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कृत-मत्सरैः तैः सः इति स्तुतः - “एषः सः विधोः आद्यम् जन्म भूमौ (अस्ति) । असौ युवा रति-वल्लभस्य द्वैतम् (अस्ति) । नासत्ययोः मूर्ति-तृतीयतायम् (अस्ति) ।”
Summary
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He was praised (sarcastically) by those envious kings thus: "This is the first birth of the moon on earth. This youth is the second form of Kamadeva, the beloved of Rati. He is the third embodiment of the two Ashvins."
पदच्छेदः
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| आद्यम् | आद्य (१.१) | the first |
| विधोः | विधु (६.१) | of the moon |
| जन्म | जन्मन् (१.१) | birth |
| सः | तद् (१.१) | he |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| भूमौ | भूमि (७.१) | on earth |
| द्वैतम् | द्वैत (१.१) | a second form |
| युवा | युवन् (१.१) | youth |
| असौ | अदस् (१.१) | this one |
| रतिवल्लभस्य | रति–वल्लभ (६.१) | of the beloved of Rati (Kamadeva) |
| नासत्ययोः | नासत्य (६.२) | of the two Ashvins |
| मूर्तितृतीयतायम् | मूर्ति–तृतीयता (१.१) | the state of being a third embodiment |
| इति | इति | thus |
| स्तुतः | स्तुत (√स्तु+क्त, १.१) | was praised |
| तैः | तद् (३.३) | by them |
| कृतमत्सरैः | कृत–मत्सर (३.३) | by the envious ones |
| सः | तद् (१.१) | he |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | द्यं | वि | धो | र्ज | न्म | स | ए | ष | भू | मौ |
| द्वै | तं | यु | वा | सौ | र | ति | व | ल्ल | भ | स्य |
| ना | स | त्य | यो | र्मू | र्ति | तृ | ती | य | ता | य |
| मि | ति | स्तु | त | स्तैः | कृ | त | म | त्स | रैः | सः |
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