सुधांशुरेषु प्रथमो भुवीति
स्मरो द्वितीयः किमसावितीमम् ।
दस्रस्तृतीयोऽयमिति क्षितीशाः
स्तुतिच्छलान्मत्सरिणो निनिन्दुः ॥
सुधांशुरेषु प्रथमो भुवीति
स्मरो द्वितीयः किमसावितीमम् ।
दस्रस्तृतीयोऽयमिति क्षितीशाः
स्तुतिच्छलान्मत्सरिणो निनिन्दुः ॥
स्मरो द्वितीयः किमसावितीमम् ।
दस्रस्तृतीयोऽयमिति क्षितीशाः
स्तुतिच्छलान्मत्सरिणो निनिन्दुः ॥
अन्वयः
AI
मत्सरिणः क्षितीशाः, “एषु भुवि प्रथमः सुधांशुः (किम्)? असौ द्वितीयः स्मरः किम्? अयम् तृतीयः दस्रः (किम्)?” इति स्तुति-छलात् इमम् निनिन्दुः ।
Summary
AI
The envious kings, under the pretext of praise, censured him (Nala) saying, "Is he the first moon on earth? Is he the second god of love? Is this the third Ashvin?"
पदच्छेदः
AI
| सुधांशुः | सुधांशु (१.१) | the moon |
| एषु | इदम् (७.३) | among these |
| प्रथमः | प्रथम (१.१) | the first |
| भुवि | भू (७.१) | on earth |
| इति | इति | thus |
| स्मरः | स्मर (१.१) | the god of love (Kamadeva) |
| द्वितीयः | द्वितीय (१.१) | the second |
| किम् | किम् | what? |
| असौ | अदस् (१.१) | this one |
| इति | इति | thus |
| इमम् | इदम् (२.१) | him |
| दस्रः | दस्र (१.१) | an Ashvin twin |
| तृतीयः | तृतीय (१.१) | the third |
| अयम् | इदम् (१.१) | this one |
| इति | इति | thus |
| क्षितीशाः | क्षितीश (१.३) | the kings |
| स्तुतिच्छलात् | स्तुति–छल (५.१) | under the pretext of praise |
| मत्सरिणः | मत्सरिन् (१.३) | envious |
| निनिन्दुः | निनिन्दुः (√निन्द् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | censured |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सु | धां | शु | रे | षु | प्र | थ | मो | भु | वी | ति |
| स्म | रो | द्वि | ती | यः | कि | म | सा | वि | ती | मम् |
| द | स्र | स्तृ | ती | यो | ऽय | मि | ति | क्षि | ती | शाः |
| स्तु | ति | च्छ | ला | न्म | त्स | रि | णो | नि | नि | न्दुः |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.