द्राग्दृष्टयः क्षोणिभुजाममुष्मी-
न्नाश्चर्यपर्युत्सुकिता निपेतुः ।
अनन्तरं दन्तुरितभ्रुवां तु
नितान्तमीर्ष्याकलुषा दृगन्ताः ॥
द्राग्दृष्टयः क्षोणिभुजाममुष्मी-
न्नाश्चर्यपर्युत्सुकिता निपेतुः ।
अनन्तरं दन्तुरितभ्रुवां तु
नितान्तमीर्ष्याकलुषा दृगन्ताः ॥
न्नाश्चर्यपर्युत्सुकिता निपेतुः ।
अनन्तरं दन्तुरितभ्रुवां तु
नितान्तमीर्ष्याकलुषा दृगन्ताः ॥
अन्वयः
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क्षोणिभुजाम् दृष्टयः द्राक् अमुष्मिन् निपेतुः, न आश्चर्य-पर्युत्सुकिताः (निपेतुः) । अनन्तरम् तु दन्तुरित-भ्रुवाम् नितान्तम् ईर्ष्या-कलुषाः दृक्-अन्ताः (निपेतुः) ।
Summary
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The gazes of the kings quickly fell upon him (Nala), not with wonder-filled curiosity. Immediately after, however, the corners of their eyes, belonging to those with furrowed brows, fell upon him, thoroughly tainted with envy.
पदच्छेदः
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| द्राक् | द्राक् | quickly |
| दृष्टयः | दृष्टि (१.३) | gazes |
| क्षोणिभुजाम् | क्षोणिभुज् (६.३) | of the kings |
| अमुष्मिन् | अदस् (७.१) | on him |
| न | न | not |
| आश्चर्यपर्युत्सुकिताः | आश्चर्य–पर्युत्सुक–ता (१.३) | filled with wonder and curiosity |
| निपेतुः | निपेतुः (नि√पत् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | fell |
| अनन्तरम् | अनन्तरम् | afterwards |
| दन्तुरितभ्रुवाम् | दन्तुरित–भ्रू (६.३) | of those with furrowed brows |
| तु | तु | but |
| नितान्तम् | नितान्तम् | extremely |
| ईर्ष्याकलुषाः | ईर्ष्या–कलुष (१.३) | tainted with envy |
| दृगन्ताः | दृक्–अन्त (१.३) | the corners of the eyes |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द्रा | ग्दृ | ष्ट | यः | क्षो | णि | भु | जा | म | मु | ष्मी |
| न्ना | श्च | र्य | प | र्यु | त्सु | कि | ता | नि | पे | तुः |
| अ | न | न्त | रं | द | न्तु | रि | त | भ्रु | वां | तु |
| नि | ता | न्त | मी | र्ष्या | क | लु | षा | दृ | ग | न्ताः |
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