सा विभ्रमं स्वप्नगतापि तस्यां
निशि स्वलाभस्य ददे यदेभ्यः ।
तदर्थिनां भूमिभुजां वदान्या
सती सती पूरयति स्म कामम् ॥
सा विभ्रमं स्वप्नगतापि तस्यां
निशि स्वलाभस्य ददे यदेभ्यः ।
तदर्थिनां भूमिभुजां वदान्या
सती सती पूरयति स्म कामम् ॥
निशि स्वलाभस्य ददे यदेभ्यः ।
तदर्थिनां भूमिभुजां वदान्या
सती सती पूरयति स्म कामम् ॥
अन्वयः
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यत् सा स्वप्न-गता अपि तस्याम् निशि एभ्यः स्व-लाभस्य विभ्रमम् ददे, तत् वदान्या सती सती अर्थिनाम् भूमि-भुजाम् कामम् पूरयति स्म ।
Summary
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Since she, even while appearing in their dreams at night, gave these kings the illusion of attaining her, that generous and virtuous lady thereby fulfilled the desires of the supplicant kings.
पदच्छेदः
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| सा | तद् (१.१) | she |
| विभ्रमम् | विभ्रम (२.१) | the illusion |
| स्वप्नगता | स्वप्न–गत (१.१) | appearing in a dream |
| अपि | अपि | even |
| तस्याम् | तद् (७.१) | in that |
| निशि | निश् (७.१) | night |
| स्वलाभस्य | स्व–लाभ (६.१) | of attaining her |
| ददे | ददे (√दा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | she gave |
| यत् | यद् | since |
| एभ्यः | इदम् (४.३) | to them |
| तत् | तद् | therefore |
| अर्थिनाम् | अर्थिन् (६.३) | of the supplicant |
| भूमिभुजाम् | भूमिभुज् (६.३) | kings |
| वदान्या | वदान्य (१.१) | generous |
| सती | सत् (√अस्+शतृ, १.१) | being |
| सती | सती (१.१) | a virtuous lady |
| पूरयति | पूरयति (√पॄ +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | fulfilled |
| स्म | स्म | (makes it past tense) |
| कामम् | काम (२.१) | the desire |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | वि | भ्र | मं | स्व | प्न | ग | ता | पि | त | स्यां |
| नि | शि | स्व | ला | भ | स्य | द | दे | य | दे | भ्यः |
| त | द | र्थि | नां | भू | मि | भु | जां | व | दा | न्या |
| स | ती | स | ती | पू | र | य | ति | स्म | का | मम् |
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