अङ्के विदर्भेन्द्रपुरस्य शङ्के
न संममौ नैष तथा समाजः ।
यथा पयोराशिरगस्त्यहस्ते
यथा जगद्वा जठरे मुरारेः ॥
अङ्के विदर्भेन्द्रपुरस्य शङ्के
न संममौ नैष तथा समाजः ।
यथा पयोराशिरगस्त्यहस्ते
यथा जगद्वा जठरे मुरारेः ॥
न संममौ नैष तथा समाजः ।
यथा पयोराशिरगस्त्यहस्ते
यथा जगद्वा जठरे मुरारेः ॥
अन्वयः
AI
शङ्के, एषः समाजः विदर्भ-इन्द्र-पुरस्य अङ्के तथा न सम्ममौ, यथा पयोराशिः अगस्त्य-हस्ते, यथा वा जगत् मुरारेः जठरे (सम्ममौ) ।
Summary
AI
I suspect that this great assembly of kings did not fit within the confines of the capital of Vidarbha's king, just as the ocean did not fit in the palm of sage Agastya, or as the entire universe fit within the stomach of Murari (Vishnu).
पदच्छेदः
AI
| अङ्के | अङ्क (७.१) | in the lap (confines) |
| विदर्भेन्द्रपुरस्य | विदर्भ–इन्द्र–पुर (६.१) | of the city of Vidarbha's king |
| शङ्के | शङ्के (√शङ्क् कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I suspect |
| न | न | not |
| संममौ | संममौ (सम्√मा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | did fit |
| नैष | न–एषः (१.१) | not this |
| तथा | तथा | so |
| समाजः | समाज (१.१) | assembly |
| यथा | यथा | as |
| पयोराशिः | पयस्–राशि (१.१) | the ocean |
| अगस्त्यहस्ते | अगस्त्य–हस्त (७.१) | in Agastya's hand |
| यथा | यथा | as |
| जगत् | जगत् (१.१) | the world |
| वा | वा | or |
| जठरे | जठर (७.१) | in the stomach |
| मुरारेः | मुरारि (६.१) | of Murari (Vishnu) |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ङ्के | वि | द | र्भे | न्द्र | पु | र | स्य | श | ङ्के |
| न | सं | म | मौ | नै | ष | त | था | स | मा | जः |
| य | था | प | यो | रा | शि | र | ग | स्त्य | ह | स्ते |
| य | था | ज | ग | द्वा | ज | ठ | रे | मु | रा | रेः |
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.