नाभूदभूमिः स्मरसायकानां
नासीदगन्ता कुलजः कुमारः ।
नास्थादपन्था धरणेः कणोऽपि
व्रजेषु राज्ञां युगपद्व्रजत्सु ॥
नाभूदभूमिः स्मरसायकानां
नासीदगन्ता कुलजः कुमारः ।
नास्थादपन्था धरणेः कणोऽपि
व्रजेषु राज्ञां युगपद्व्रजत्सु ॥
नासीदगन्ता कुलजः कुमारः ।
नास्थादपन्था धरणेः कणोऽपि
व्रजेषु राज्ञां युगपद्व्रजत्सु ॥
अन्वयः
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राज्ञाम् व्रजेषु युगपत् व्रजत्सु (सत्सु), (कश्चित्) कुलजः कुमारः स्मरसायकानाम् अभूमिः न अभूत्। (कश्चित्) अगन्ता न आसीत्। धरणेः कणः अपि अपन्थाः न आस्थात्।
Summary
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As the processions of kings moved simultaneously, there was no noble prince who was not a target for Kama's arrows, and none who did not go. Not even a particle of the earth remained untrodden to become a path.
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| अभूमिः | अभूमि (१.१) | a non-target |
| स्मरसायकानाम् | स्मर–सायक (६.३) | of Kama's arrows |
| न | न | not |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| अगन्ता | अगन्तृ (१.१) | one who did not go |
| कुलजः | कुलज (१.१) | a noble-born |
| कुमारः | कुमार (१.१) | prince |
| न | न | not |
| आस्थात् | आस्थात् (आ√स्था कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | remained |
| अपन्थाः | अपथिन् (१.१) | untrodden |
| धरणेः | धरणी (६.१) | of the earth |
| कणः | कण (१.१) | a particle |
| अपि | अपि | even |
| व्रजेषु | व्रज (७.३) | in the processions |
| राज्ञाम् | राजन् (६.३) | of the kings |
| युगपत् | युगपत् | simultaneously |
| व्रजत्सु | व्रजत् (√व्रज्+शतृ, ७.३) | while moving |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ना | भू | द | भू | मिः | स्म | र | सा | य | का | नां |
| ना | सी | द | ग | न्ता | कु | ल | जः | कु | मा | रः |
| ना | स्था | द | प | न्था | ध | र | णेः | क | णो | ऽपि |
| व्र | जे | षु | रा | ज्ञां | यु | ग | प | द्व्र | ज | त्सु |
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