प्रयस्यतां तद्भवितुं सुराणां
दृष्टेन पृष्टेन परस्परेण ।
नैवानुमेने नलसाम्यसिद्धिः
स्वाभाविकात्कृत्रिममन्यदेव ॥
प्रयस्यतां तद्भवितुं सुराणां
दृष्टेन पृष्टेन परस्परेण ।
नैवानुमेने नलसाम्यसिद्धिः
स्वाभाविकात्कृत्रिममन्यदेव ॥
दृष्टेन पृष्टेन परस्परेण ।
नैवानुमेने नलसाम्यसिद्धिः
स्वाभाविकात्कृत्रिममन्यदेव ॥
अन्वयः
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तत् भवितुम् प्रयस्यताम् सुराणाम् परस्पर-ईण दृष्टेन पृष्टेन (च), नल-साम्य-सिद्धिः न एव अनुमेने। स्वाभाविकात् कृत्रिमम् अन्यत् एव (भवति)।
Summary
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Among the gods striving to become Nala, the success of their resemblance was not confirmed even by looking at or questioning each other. Indeed, the artificial is always different from the natural.
पदच्छेदः
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| प्रयस्यताम् | प्रयस्यत् (प्र√यस्+शतृ, ६.३) | of those striving |
| तत् | तद् | that |
| भवितुम् | भवितुम् (√भू+तुमुन्) | to become |
| सुराणाम् | सुर (६.३) | of the gods |
| दृष्टेन | दृष्ट (√दृश्+क्त, ३.१) | by seeing |
| पृष्टेन | पृष्ट (√प्रछ्+क्त, ३.१) | by asking |
| परस्परेण | परस्पर (३.१) | each other |
| न | न | not |
| एव | एव | even |
| अनुमेने | अनुमेने (अनु√मा भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was confirmed |
| नल-साम्य-सिद्धिः | नल–साम्य–सिद्धि (१.१) | the accomplishment of resemblance to Nala |
| स्वाभाविकात् | स्वाभाविक (५.१) | from the natural |
| कृत्रिमम् | कृत्रिम (१.१) | the artificial |
| अन्यत् | अन्य (१.१) | different |
| एव | एव | indeed is |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | य | स्य | तां | त | द्भ | वि | तुं | सु | रा | णां |
| दृ | ष्टे | न | पृ | ष्टे | न | प | र | स्प | रे | ण |
| नै | वा | नु | मे | ने | न | ल | सा | म्य | सि | द्धिः |
| स्वा | भा | वि | का | त्कृ | त्रि | म | म | न्य | दे | व |
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