स्वयंवरं भीमनरेन्द्रजाया
दिशः पतिनां प्रविवेश शेषः ।
प्रयातु भारं स निवेश्य कस्मि-
न्नहिर्महीगौरवसासहिर्यः ॥
स्वयंवरं भीमनरेन्द्रजाया
दिशः पतिनां प्रविवेश शेषः ।
प्रयातु भारं स निवेश्य कस्मि-
न्नहिर्महीगौरवसासहिर्यः ॥
दिशः पतिनां प्रविवेश शेषः ।
प्रयातु भारं स निवेश्य कस्मि-
न्नहिर्महीगौरवसासहिर्यः ॥
अन्वयः
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दिशः पतिनाम् शेषः (अनन्तः) भीमनरेन्द्र-जायाः स्वयंवरम् प्रविवेश। यः अहिः मही-गौरव-सासहिः, सः भारम् कस्मिन् निवेश्य प्रयातु?
Summary
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Shesha, the last of the lords of the directions (lord of the netherworld), is said to have entered the Svayamvara. But how could he go? On whom could that serpent, who constantly bears the weight of the earth, place his burden before departing?
पदच्छेदः
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| स्वयंवरम् | स्वयंवर (२.१) | the Svayamvara |
| भीमनरेन्द्र-जायाः | भीमनरेन्द्र–जाया (६.१) | of King Bhima's daughter |
| दिशः | दिश् (६.१) | of the direction |
| पतिनाम् | पति (६.३) | of the lords |
| प्रविवेश | प्रविवेश (प्र√विश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | entered |
| शेषः | शेष (१.१) | Shesha (the last one) |
| प्रयातु | प्रयातु (प्र√या कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | how could he go |
| भारम् | भार (२.१) | the burden |
| सः | तद् (१.१) | he |
| निवेश्य | निवेश्य (नि√विश्+ल्यप्) | having placed |
| कस्मिन् | किम् (७.१) | on whom |
| अहिः | अहि (१.१) | the serpent |
| मही-गौरव-सासहिः | मही–गौरव–सासहि (√सह्+यङ्, १.१) | who constantly bears the weight of the earth |
| यः | यद् (१.१) | who |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्व | यं | व | रं | भी | म | न | रे | न्द्र | जा | या |
| दि | शः | प | ति | नां | प्र | वि | वे | श | शे | षः |
| प्र | या | तु | भा | रं | स | नि | वे | श्य | क | स्मि |
| न्न | हि | र्म | ही | गौ | र | व | सा | स | हि | र्यः |
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