भैमीविवाहं सहते स्म कस्माद्
अर्धं तनुर्या गिरिजात्मभर्तुः ।
तेनाव्रजन्त्या विदधे विदर्भा-
नीशानयानाय तयान्तरायः ॥
भैमीविवाहं सहते स्म कस्माद्
अर्धं तनुर्या गिरिजात्मभर्तुः ।
तेनाव्रजन्त्या विदधे विदर्भा-
नीशानयानाय तयान्तरायः ॥
अर्धं तनुर्या गिरिजात्मभर्तुः ।
तेनाव्रजन्त्या विदधे विदर्भा-
नीशानयानाय तयान्तरायः ॥
अन्वयः
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या गिरिजा आत्म-भर्तुः तनोः अर्धम् (अस्ति), (सा) भैमी-विवाहम् कस्मात् सहते स्म? तेन अव्रजन्त्या तया ईशान-यानाय विदर्भान् अन्तरायः विदधे।
Summary
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How could Parvati, who is half the body of her own husband Shiva, tolerate Damayanti's marriage to another? Therefore, by her not going, she created an obstacle for Shiva's journey to Vidarbha.
पदच्छेदः
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| भैमी-विवाहम् | भैमी–विवाह (२.१) | Bhaimi's marriage |
| सहते स्म | सहते स्म (√सह् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | could tolerate |
| कस्मात् | किम् (५.१) | why |
| अर्धम् | अर्ध (१.१) | half |
| तनोः | तनु (६.१) | of the body |
| या | यद् (१.१) | she who |
| गिरिजा | गिरिजा (१.१) | Girija (Parvati) |
| आत्म-भर्तुः | आत्मन्–भर्तृ (६.१) | of her own husband |
| तेन | तेन | Therefore |
| अव्रजन्त्या | अव्रजत् (√व्रज्+शतृ, ३.१) | by her not going |
| विदधे | विदधे (वि√धा कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was created |
| विदर्भान् | विदर्भ (२.३) | to Vidarbha |
| ईशान-यानाय | ईशान–यान (४.१) | for Ishana's (Shiva's) journey |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| अन्तरायः | अन्तराय (१.१) | an obstacle |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भै | मी | वि | वा | हं | स | ह | ते | स्म | क | स्मा |
| द | र्धं | त | नु | र्या | गि | रि | जा | त्म | भ | र्तुः |
| ते | ना | व्र | ज | न्त्या | वि | द | धे | वि | द | र्भा |
| नी | शा | न | या | ना | य | त | या | न्त | रा | यः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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