रसस्य शृङ्गार इति श्रुतस्य
क्व नाम जागर्ति महानुदन्वान् ।
कस्मादुदस्थादियमन्यथा श्री-
र्लावण्यवैदग्ध्यनिधिः पयोधेः ॥
रसस्य शृङ्गार इति श्रुतस्य
क्व नाम जागर्ति महानुदन्वान् ।
कस्मादुदस्थादियमन्यथा श्री-
र्लावण्यवैदग्ध्यनिधिः पयोधेः ॥
क्व नाम जागर्ति महानुदन्वान् ।
कस्मादुदस्थादियमन्यथा श्री-
र्लावण्यवैदग्ध्यनिधिः पयोधेः ॥
अन्वयः
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शृङ्गारः इति श्रुतस्य रसस्य महान् उदन्वान् क्व नाम जागर्ति? अन्यथा इयम् लावण्य वैदग्ध्य निधिः श्रीः कस्मात् पयोधेः उदस्थात्?
Summary
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"Where indeed is that great ocean of the sentiment known as Shringara (love/beauty)? Otherwise, from what ocean could this goddess of fortune, this treasure of charm and elegance, have arisen?" (Implying she must have arisen from the mythical ocean of Shringara rasa).
पदच्छेदः
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| रसस्य | रस (६.१) | of the sentiment |
| शृङ्गारः | शृङ्गार (१.१) | Shringara |
| इति | इति | called |
| श्रुतस्य | श्रुत (√श्रु+क्त, ६.१) | of the heard |
| क्व | क्व | where |
| नाम | नाम | indeed |
| जागर्ति | जागर्ति (√जागृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | exists |
| महान् | महत् (१.१) | great |
| उदन्वान् | उदन्वत् (१.१) | ocean |
| कस्मात् | किम् (५.१) | from what |
| उदस्थात् | उदस्थात् (उद्√स्था कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | arose |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| अन्यथा | अन्यथा | otherwise |
| श्रीः | श्री (१.१) | Shri (Lakshmi) |
| लावण्यवैदग्ध्यनिधिः | लावण्य–वैदग्ध्य–निधि (१.१) | a treasure of charm and elegance |
| पयोधेः | पयोधि (५.१) | from the ocean |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | स | स्य | शृ | ङ्गा | र | इ | ति | श्रु | त | स्य |
| क्व | ना | म | जा | ग | र्ति | म | हा | नु | द | न्वान् |
| क | स्मा | दु | द | स्था | दि | य | म | न्य | था | श्री |
| र्ला | व | ण्य | वै | द | ग्ध्य | नि | धिः | प | यो | धेः |
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