रूपं यदाकर्ण्य जनाननेभ्य-
स्तत्तद्दिगन्ताद्वयमागमाम ।
सौन्दर्यसारादनुभूयमाना-
दस्यास्तदस्माद्बहु नाकनीयः ॥
रूपं यदाकर्ण्य जनाननेभ्य-
स्तत्तद्दिगन्ताद्वयमागमाम ।
सौन्दर्यसारादनुभूयमाना-
दस्यास्तदस्माद्बहु नाकनीयः ॥
स्तत्तद्दिगन्ताद्वयमागमाम ।
सौन्दर्यसारादनुभूयमाना-
दस्यास्तदस्माद्बहु नाकनीयः ॥
अन्वयः
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वयम् यत् रूपम् जन आननेभ्यः आकर्ण्य तत् तत् दिक् अन्तात् आगमाम, तत् (श्रुतम्) अस्याः अनुभूयमानात् अस्मात् सौन्दर्य सारात् बहु न अकनीयः (अस्ति) ।
Summary
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"We came from various distant quarters after hearing of her beauty from the mouths of people. But that which we heard is not much less than this essence of beauty we are now experiencing." (This is an understatement meaning her actual beauty far exceeds its reputation).
पदच्छेदः
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| रूपम् | रूप (२.१) | the beauty |
| यत् | यद् (२.१) | which |
| आकर्ण्य | आकर्ण्य (आ√कर्ण्+ल्यप्) | having heard |
| जनाननेभ्यः | जन–आनन (५.३) | from the mouths of people |
| तत्तद्दिगन्तात् | तद्–तद्–दिक्–अन्त (५.१) | from various quarters |
| वयम् | अस्मद् (१.३) | we |
| आगमाम | आगमाम (आ√गम् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) उ.पु. बहु.) | have come |
| सौन्दर्यसारात् | सौन्दर्य–सार (५.१) | than the essence of beauty |
| अनुभूयमानात् | अनुभूयमान (अनु√भू+कर्मणि+शानच्, ५.१) | from the one being experienced |
| अस्याः | इदम् (६.१) | of her |
| तत् | तद् (१.१) | that (which was heard) |
| अस्मात् | इदम् (५.१) | than this (which is seen) |
| बहु | बहु | much |
| न | न | not |
| अकनीयः | अकनीयस् (१.१) | lesser |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रू | पं | य | दा | क | र्ण्य | ज | ना | न | ने | भ्य |
| स्त | त्त | द्दि | ग | न्ता | द्व | य | मा | ग | मा | म |
| सौ | न्द | र्य | सा | रा | द | नु | भू | य | मा | ना |
| द | स्या | स्त | द | स्मा | द्ब | हु | ना | क | नी | यः |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||
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