तारा रदानां वदनस्य चन्द्रं
रुचा कचानां च नभो जयन्तीम् ।
आकण्ठमक्ष्णोर्द्वितयं मधूनि
महीभुजः कस्य न भोजयन्तीम् ॥
तारा रदानां वदनस्य चन्द्रं
रुचा कचानां च नभो जयन्तीम् ।
आकण्ठमक्ष्णोर्द्वितयं मधूनि
महीभुजः कस्य न भोजयन्तीम् ॥
रुचा कचानां च नभो जयन्तीम् ।
आकण्ठमक्ष्णोर्द्वितयं मधूनि
महीभुजः कस्य न भोजयन्तीम् ॥
अन्वयः
AI
रदानाम् (रुचा) ताराः, वदनस्य (रुचा) चन्द्रम्, कचानाम् रुचा च नभः जयन्तीम्, कस्य महीभुजः अक्ष्णोः द्वितयम् आकण्ठम् मधूनि न भोजयन्तीम् (ताम् ददृशुः) ?
Summary
AI
They saw her, who conquered the stars with the lustre of her teeth, the moon with her face, and the sky with her hair. Which king was she not making drink honey up to the throat with her pair of eyes? (Meaning, all kings were captivated).
पदच्छेदः
AI
| ताराः | तारा (२.३) | the stars |
| रदानाम् | रदन (६.३) | of her teeth |
| वदनस्य | वदन (६.१) | of her face |
| चन्द्रम् | चन्द्र (२.१) | the moon |
| रुचा | रुच् (३.१) | with the lustre |
| कचानाम् | कच (६.३) | of her hair |
| च | च | and |
| नभः | नभस् (२.१) | the sky |
| जयन्तीम् | जयत् (√जि+शतृ, २.१) | conquering |
| आकण्ठम् | आकण्ठम् | up to the throat |
| अक्ष्णोः | अक्षि (६.२) | of her two eyes |
| द्वितयम् | द्वितय (१.१) | the pair |
| मधूनि | मधु (२.३) | honeys |
| महीभुजः | महीभुज् (२.३) | the kings |
| कस्य | किम् (६.१) | which |
| न | न | not |
| भोजयन्तीम् | भोजयत् (√भुज्+णिच्+शतृ, २.१) | causing to enjoy |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | रा | र | दा | नां | व | द | न | स्य | च | न्द्रं |
| रु | चा | क | चा | नां | च | न | भो | ज | य | न्तीम् |
| आ | क | ण्ठ | म | क्ष्णो | र्द्वि | त | यं | म | धू | नि |
| म | ही | भु | जः | क | स्य | न | भो | ज | य | न्तीम् |
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