मुनिद्रुमः कोरकितः शितिद्युति-
र्वनेऽमनाऽमन्यत सिंहिकासुतः ।
तमिस्रपक्षत्रुटिकूटभक्षितं
कलाकलापं किल वैधवं वमन् ॥
मुनिद्रुमः कोरकितः शितिद्युति-
र्वनेऽमनाऽमन्यत सिंहिकासुतः ।
तमिस्रपक्षत्रुटिकूटभक्षितं
कलाकलापं किल वैधवं वमन् ॥
र्वनेऽमनाऽमन्यत सिंहिकासुतः ।
तमिस्रपक्षत्रुटिकूटभक्षितं
कलाकलापं किल वैधवं वमन् ॥
अन्वयः
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अमनाः सः (नलः) वने, तमिस्रपक्षत्रुटिकूटभक्षितं वैधवं कलाकलापं किल वमन्तं शितिद्युतिं कोरकितं मुनिद्रुमं सिंहिकासुतम् (इव) अमन्यत ।
Summary
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With a disturbed mind, Nala saw a dark, budding Agastya tree in the forest. He imagined it to be Rahu, who was, as it were, vomiting the digits of the moon that he had deceitfully devoured during the dark fortnight.
पदच्छेदः
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| मुनिद्रुमः | मुनिद्रुम (१.१) | the Agastya tree |
| कोरकितः | कोरकित (१.१) | budded |
| शितिद्युतिः | शिति–द्युति (१.१) | having a dark lustre |
| वने | वन (७.१) | in the forest |
| अमनाः | अमनस् (१.१) | disturbed in mind |
| अमन्यत | अमन्यत (√मन् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | thought / imagined |
| सिंहिकासुतः | सिंहिका–सुत (१.१) | the son of Simhika (Rahu) |
| तमिस्रपक्षत्रुटिकूटभक्षितम् | तमिस्रपक्ष–त्रुटि–कूट–भक्षित (√भक्ष्+क्त, २.१) | eaten by the deceitful bit of the dark fortnight |
| कलाकलापम् | कला–कलाप (२.१) | the collection of digits |
| किल | किल | as it were |
| वैधवम् | वैधव (२.१) | of the moon |
| वमन् | वमन् (√वम्+शतृ, १.१) | vomiting |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मु | नि | द्रु | मः | को | र | कि | तः | शि | ति | द्यु | ति |
| र्व | ने | ऽम | ना | ऽम | न्य | त | सिं | हि | का | सु | तः |
| त | मि | स्र | प | क्ष | त्रु | टि | कू | ट | भ | क्षि | तं |
| क | ला | क | ला | पं | कि | ल | वै | ध | वं | व | मन् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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