रसालसालः समदृश्यतामुना
स्फुरद्द्विरेफारवरोषहुंकृतिः ।
समीरलोलैर्मुकुलैर्वियोगिने
जनाय दित्सन्निव तर्जनाभियम् ॥
रसालसालः समदृश्यतामुना
स्फुरद्द्विरेफारवरोषहुंकृतिः ।
समीरलोलैर्मुकुलैर्वियोगिने
जनाय दित्सन्निव तर्जनाभियम् ॥
स्फुरद्द्विरेफारवरोषहुंकृतिः ।
समीरलोलैर्मुकुलैर्वियोगिने
जनाय दित्सन्निव तर्जनाभियम् ॥
अन्वयः
AI
अमुना स्फुरत्-द्विरेफ-अरव-रोष-हुंकृतिः रसाल-सालः, समीर-लोलैः मुकुलैः वियोगिने जनाय तर्जना-भियम् दित्सन् इव, समदृश्यत ।
Summary
AI
He saw the mango tree, whose buzzing bees sounded like angry snorts. With its wind-shaken buds resembling threatening fingers, the tree seemed as if it wished to menace and frighten the separated lover.
पदच्छेदः
AI
| रसालसालः | रसाल–साल (१.१) | the mango tree |
| समदृश्यत | समदृश्यत (सम्√दृश् भावकर्मणोः लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was seen |
| अमुना | अदस् (३.१) | by him |
| स्फुरत् | स्फुरत् (√स्फुर्+शतृ) | vibrant |
| द्विरेफ | द्विरेफ | bees' |
| अरव | अरव | sounds |
| रोष | रोष | angry |
| हुंकृतिः | हुंकृति (१.१) | whose snorts |
| समीरलोलैः | समीर–लोल (३.३) | shaken by the wind |
| मुकुलैः | मुकुल (३.३) | with buds |
| वियोगिने | वियोगिन् (४.१) | to the separated |
| जनाय | जन (४.१) | person |
| दित्सन् | दित्सत् (√दा+सन्+शतृ, १.१) | wishing to give |
| इव | इव | as if |
| तर्जनाभियम् | तर्जना–भी (२.१) | threat and fear |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | सा | ल | सा | लः | स | म | दृ | श्य | ता | मु | ना |
| स्फु | र | द्द्वि | रे | फा | र | व | रो | ष | हुं | कृ | तिः |
| स | मी | र | लो | लै | र्मु | कु | लै | र्वि | यो | गि | ने |
| ज | ना | य | दि | त्स | न्नि | व | त | र्ज | ना | भि | यम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.