अचीकरच्चारु हयेन या भ्रमी-
र्निजातपत्रस्य तलस्थले नलः ।
मरुत्किमद्यापि न तासु शिक्षते
वितत्य वात्यामयचक्रङ्क्रमान् ॥
अचीकरच्चारु हयेन या भ्रमी-
र्निजातपत्रस्य तलस्थले नलः ।
मरुत्किमद्यापि न तासु शिक्षते
वितत्य वात्यामयचक्रङ्क्रमान् ॥
र्निजातपत्रस्य तलस्थले नलः ।
मरुत्किमद्यापि न तासु शिक्षते
वितत्य वात्यामयचक्रङ्क्रमान् ॥
अन्वयः
AI
नलः निज-आतपत्रस्य तल-स्थले हयेन याः चारु भ्रमीः अचीकरत्, मरुत् अद्य अपि तासु वात्यामय-चक्र-चङ्क्रमान् वितत्य किम् न शिक्षते?
Summary
AI
Nala made his horse perform such beautiful circular movements on the ground beneath his royal umbrella. It seems as if the wind, even today, is learning from those movements by spreading out its own circular wanderings in the form of whirlwinds.
पदच्छेदः
AI
| अचीकरत् | अचीकरत् (√कृ +णिच् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | caused to make |
| चारु | चारु (२.३) | beautiful |
| हयेन | हय (३.१) | by the horse |
| याः | यद् (२.३) | which |
| भ्रमीः | भ्रमि (२.३) | circular movements |
| निजातपत्रस्य | निज–आतपत्र (६.१) | of his own royal umbrella |
| तलस्थले | तल–स्थल (७.१) | on the ground beneath |
| नलः | नल (१.१) | Nala |
| मरुत् | मरुत् (१.१) | the wind |
| किम् | किम् | why |
| अद्य | अद्य | today |
| अपि | अपि | even |
| न | न | not |
| तासु | तद् (७.३) | in those |
| शिक्षते | शिक्षते (√शिक्ष् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | learns |
| वितत्य | वितत्य (वि√तन्+ल्यप्) | spreading out |
| वात्यामयचक्रचङ्क्रमान् | वात्यामय–चक्र–चङ्क्रम (२.३) | the circular wanderings of a whirlwind |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ची | क | र | च्चा | रु | ह | ये | न | या | भ्र | मी |
| र्नि | जा | त | प | त्र | स्य | त | ल | स्थ | ले | न | लः |
| म | रु | त्कि | म | द्या | पि | न | ता | सु | शि | क्ष | ते |
| वि | त | त्य | वा | त्या | म | य | च | क्र | ङ्क्र | मान् | |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.