ततः प्रतीच्छ प्रहरेति भाषिणी
परस्परोल्लासितशल्यपल्लवे ।
मृषामृघं सादिबले कुतूहला-
न्नलस्य नासीरगते वितेनतुः ॥
ततः प्रतीच्छ प्रहरेति भाषिणी
परस्परोल्लासितशल्यपल्लवे ।
मृषामृघं सादिबले कुतूहला-
न्नलस्य नासीरगते वितेनतुः ॥
परस्परोल्लासितशल्यपल्लवे ।
मृषामृघं सादिबले कुतूहला-
न्नलस्य नासीरगते वितेनतुः ॥
अन्वयः
AI
ततः नलस्य नासीर-गते (सति), 'प्रतीच्छ', 'प्रहर' इति भाषिणी परस्पर-उल्लासित-शल्य-पल्लवे सादि-बले कुतूहलात् मृषा-मृधम् वितेनतुः ।
Summary
AI
After Nala had advanced to the vanguard, the two divisions of his cavalry, out of sportive enthusiasm, engaged in a mock battle. They shouted challenges like "Take this!" and "Strike!" while raising their sprout-like javelins at each other.
पदच्छेदः
AI
| ततः | ततः | then |
| प्रतीच्छ | प्रतीच्छ (प्रति√इष् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | accept |
| प्रहर | प्रहर (प्र√हृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | strike |
| इति | इति | thus |
| भाषिणी | भाषिन् (१.२) | speaking |
| परस्परोल्लासितशल्यपल्लवे | परस्पर–उल्लासित–शल्य–पल्लव (१.२) | in which sprout-like javelins were raised against each other |
| मृषामृधम् | मृषा–मृध (२.१) | a mock battle |
| सादिबले | सादिबल (१.२) | the two cavalry forces |
| कुतूहलात् | कुतूहल (५.१) | out of eagerness |
| नलस्य | नल (६.१) | of Nala |
| नासीरगते | नासीर–गत (७.१) | having gone to the vanguard |
| वितेनतुः | वितेनतुः (वि√तन् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | they performed |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | प्र | ती | च्छ | प्र | ह | रे | ति | भा | षि | णी |
| प | र | स्प | रो | ल्ला | सि | त | श | ल्य | प | ल्ल | वे |
| मृ | षा | मृ | घं | सा | दि | ब | ले | कु | तू | ह | ला |
| न्न | ल | स्य | ना | सी | र | ग | ते | वि | ते | न | तुः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.