निजा मयूखा इव तीक्ष्णदीधितिं
स्फुटारविन्दाङ्कितपाणिपङ्कजम् ।
तमश्ववारा जवनाश्वयायिनं
प्रकाशरूपा मनुजेशमन्वयुः ॥
निजा मयूखा इव तीक्ष्णदीधितिं
स्फुटारविन्दाङ्कितपाणिपङ्कजम् ।
तमश्ववारा जवनाश्वयायिनं
प्रकाशरूपा मनुजेशमन्वयुः ॥
स्फुटारविन्दाङ्कितपाणिपङ्कजम् ।
तमश्ववारा जवनाश्वयायिनं
प्रकाशरूपा मनुजेशमन्वयुः ॥
अन्वयः
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प्रकाश-रूपाः अश्ववाराः, तीक्ष्णदीधितिम् निजाः मयूखाः इव, स्फुट-अरविन्द-अङ्कित-पाणि-पङ्कजम् जवन-अश्व-यायिनम् तम् मनुज-ईशम् अन्वयुः ।
Summary
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Horsemen of brilliant appearance followed King Nala, who rode a swift horse and whose hands were marked with a distinct lotus sign. Their procession was likened to the Sun's own rays following the Sun itself.
पदच्छेदः
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| निजाः | निज (१.३) | own |
| मयूखाः | मयूख (१.३) | rays |
| इव | इव | like |
| तीक्ष्णदीधितिम् | तीक्ष्ण–दीधिति (२.१) | the sharp-rayed one (the Sun) |
| स्फुटारविन्दाङ्कितपाणिपङ्कजम् | स्फुट–अरविन्द–अङ्कित–पाणि–पङ्कज (२.१) | he whose lotus-like hands were marked with a distinct lotus |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| अश्ववाराः | अश्ववार (१.३) | the horsemen |
| जवनाश्वयायिनम् | जवन–अश्व–यायिन् (२.१) | rider of a swift horse |
| प्रकाशरूपाः | प्रकाश–रूप (१.३) | of brilliant appearance |
| मनुजेशम् | मनुज–ईश (२.१) | the lord of men |
| अन्वयुः | अन्वयुः (अनु√इ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they followed |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | जा | म | यू | खा | इ | व | ती | क्ष्ण | दी | धि | तिं |
| स्फु | टा | र | वि | न्दा | ङ्कि | त | पा | णि | प | ङ्क | जम् |
| त | म | श्व | वा | रा | ज | व | ना | श्व | या | यि | नं |
| प्र | का | श | रू | पा | म | नु | जे | श | म | न्व | युः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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