महारथस्याध्वनि चक्रवर्तिनः
परानपेक्षोद्वहनाद्यशः सितम् ।
रदावदातांशुमिषादनीदृशां
हसन्तमन्तर्बलमर्वतां रवेः ॥
महारथस्याध्वनि चक्रवर्तिनः
परानपेक्षोद्वहनाद्यशः सितम् ।
रदावदातांशुमिषादनीदृशां
हसन्तमन्तर्बलमर्वतां रवेः ॥
परानपेक्षोद्वहनाद्यशः सितम् ।
रदावदातांशुमिषादनीदृशां
हसन्तमन्तर्बलमर्वतां रवेः ॥
अन्वयः
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(सः हयः) महारथस्य चक्रवर्तिनः (नलस्य) अध्वनि पर-अनपेक्ष-उद्वहनात् सितम् यशः (इव स्थितः), रद-अवदात-अंशु-मिषात् रवेः अर्वताम् अनीदृशाम् अन्तः-बलम् हसन्तम् (इव आसीत्) ।
Summary
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This verse describes Nala's horse. It is said to embody the white fame of its master, earned through self-reliant conquests. On the pretext of the white gleam of its teeth, the horse seems to mock the inner strength of the Sun's incomparable steeds.
पदच्छेदः
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| महारथस्य | महा–रथ (६.१) | of the great warrior |
| अध्वनि | अध्वन् (७.१) | on the path |
| चक्रवर्तिनः | चक्रवर्तिन् (६.१) | of the emperor |
| परानपेक्षोद्वहनात् | पर–अनपेक्ष–उद्वहन (५.१) | from carrying without depending on others |
| यशः | यशस् (१.१) | fame |
| सितम् | सित (१.१) | white |
| रदावदातांशुमिषात् | रद–अवदात–अंशु–मिष (५.१) | on the pretext of the white rays of its teeth |
| अनीदृशाम् | अनीदृश (६.३) | of the incomparable ones |
| हसन्तम् | हसत् (√हस्+शतृ, २.१) | laughing at |
| अन्तर्बलम् | अन्तर्–बल (२.१) | the inner strength |
| अर्वताम् | अर्वत् (६.३) | of the horses |
| रवेः | रवि (६.१) | of the Sun |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | हा | र | थ | स्या | ध्व | नि | च | क्र | व | र्ति | नः |
| प | रा | न | पे | क्षो | द्व | ह | ना | द्य | शः | सि | तम् |
| र | दा | व | दा | तां | शु | मि | षा | द | नी | दृ | शां |
| ह | स | न्त | म | न्त | र्ब | ल | म | र्व | तां | र | वेः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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