अलं नलं रोद्धुममी किलाभव-
न्गुणा विवेकप्रमुखा न चापलम्
स्मरः स रत्यामनिरुद्धमेव
यत्सृजत्ययं सर्गनिसर्ग ईदृश्-
अः
अलं नलं रोद्धुममी किलाभव-
न्गुणा विवेकप्रमुखा न चापलम्
स्मरः स रत्यामनिरुद्धमेव
यत्सृजत्ययं सर्गनिसर्ग ईदृश्-
अः
न्गुणा विवेकप्रमुखा न चापलम्
स्मरः स रत्यामनिरुद्धमेव
यत्सृजत्ययं सर्गनिसर्ग ईदृश्-
अः
अन्वयः
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विवेकप्रमुखाः अमी गुणाः नलं रोद्धुम् अलं न अभवन् किल, च चापलं रोद्धुम् अलं न अभवन्। यत् सः स्मरः रत्याम् अनिरुद्धम् एव सृजति, अयं सर्गनिसर्गः ईदृशः।
Summary
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Indeed, these virtues led by discrimination were not able to restrain Nala, nor his fickleness. Because that Kāma begets Aniruddha (the 'unobstructed') in Rati, such is the very nature of creation.
पदच्छेदः
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| अलं | अलं | able |
| नलं | नल (२.१) | Nala |
| रोद्धुम् | रोद्धुम् (√रुध्+तुमुन्) | to restrain |
| अमी | अदस् (१.३) | these |
| किल | किल | indeed |
| अभवन् | अभवन् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | were |
| गुणाः | गुण (१.३) | virtues |
| विवेकप्रमुखाः | विवेक–प्रमुख (१.३) | led by discrimination |
| न | न | not |
| च | च | and |
| चापलं | चापल (२.१) | fickleness |
| स्मरः | स्मर (१.१) | Kāma |
| सः | तद् (१.१) | he |
| रत्याम् | रति (७.१) | in Rati |
| अनिरुद्धम् | अनिरुद्ध (२.१) | Aniruddha (the unobstructed) |
| एव | एव | indeed |
| यत् | यत् | because |
| सृजति | सृजति (√सृज् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | creates |
| अयं | इदम् (१.१) | this |
| सर्गनिसर्गः | सर्ग–निसर्ग (१.१) | nature of creation |
| ईदृशः | ईदृश (१.१) | is such |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | लं | न | लं | रो | द्धु | म | मी | कि | ला | भ | व |
| न्गु | णा | वि | वे | क | प्र | मु | खा | न | चा | प | लम् |
| स्म | रः | स | र | त्या | म | नि | रु | द्ध | मे | व | य |
| त्सृ | ज | त्य | यं | स | र्ग | नि | स | र्ग | ई | दृ | शः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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