मनोरथेन स्वपतीकृतं नलं
निशि क्व सा न स्वपति स्म पश्यति ।
अदृष्टमप्यर्थमदृष्टवैभवा-
त्करोति सुप्तिर्जनदर्शनातिथिम् ॥
मनोरथेन स्वपतीकृतं नलं
निशि क्व सा न स्वपति स्म पश्यति ।
अदृष्टमप्यर्थमदृष्टवैभवा-
त्करोति सुप्तिर्जनदर्शनातिथिम् ॥
निशि क्व सा न स्वपति स्म पश्यति ।
अदृष्टमप्यर्थमदृष्टवैभवा-
त्करोति सुप्तिर्जनदर्शनातिथिम् ॥
अन्वयः
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सा मनोरथेन स्वपतीकृतम् नलम् निशि स्वपति क्व न पश्यति स्म? सुप्तिः अदृष्टवैभवात् अदृष्टम् अपि अर्थम् जनदर्शन-अतिथिम् करोति।
Summary
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When did she not see Nala, whom she had made her husband in her imagination, while sleeping at night? Indeed, sleep, by its own mysterious power, makes even a person who has never been seen before a guest of one's sight.
पदच्छेदः
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| मनोरथेन | मनोरथ (३.१) | by her wishful thinking |
| स्वपतीकृतम् | स्वपति–कृत (२.१) | made her own husband |
| नलम् | नल (२.१) | Nala |
| निशि | निश् (७.१) | at night |
| क्व | क्व | when |
| सा | तद् (१.१) | she |
| न | न | not |
| स्वपति | स्वपति (√स्वप् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | while sleeping |
| स्म | स्म | (particle for past tense) |
| पश्यति | पश्यति (√दृश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | did see |
| अदृष्टम् | अदृष्ट (अ√दृश्+क्त, २.१) | unseen |
| अपि | अपि | even |
| अर्थम् | अर्थ (२.१) | a person/object |
| अदृष्टवैभवात् | अदृष्ट–वैभव (५.१) | due to its unseen power |
| करोति | करोति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | makes |
| सुप्तिः | सुप्ति (१.१) | sleep |
| जनदर्शनातिथिम् | जन–दर्शन–अतिथि (२.१) | a guest of one's sight |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | नो | र | थे | न | स्व | प | ती | कृ | तं | न | लं |
| नि | शि | क्व | सा | न | स्व | प | ति | स्म | प | श्य | ति |
| अ | दृ | ष्ट | म | प्य | र्थ | म | दृ | ष्ट | वै | भ | वा |
| त्क | रो | ति | सु | प्ति | र्ज | न | द | र्श | ना | ति | थिम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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