नलस्य पृष्टा निषधागता गुणा-
न्मिषेण दूतद्विजबन्दिचारणाः ।
निपीय तत्कीर्तिकथामथानया
चिराय तस्थे विमनायमानया ॥
नलस्य पृष्टा निषधागता गुणा-
न्मिषेण दूतद्विजबन्दिचारणाः ।
निपीय तत्कीर्तिकथामथानया
चिराय तस्थे विमनायमानया ॥
न्मिषेण दूतद्विजबन्दिचारणाः ।
निपीय तत्कीर्तिकथामथानया
चिराय तस्थे विमनायमानया ॥
अन्वयः
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अथ अनया मिषेण नलस्य गुणान् पृष्टाः निषधागताः दूत-द्विज-बन्दि-चारणाः तत्-कीर्ति-कथाम् निपीय, विमनायमानया (अनया सह) चिराय तस्थे।
Summary
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Then, on some pretext, she would ask messengers, Brahmins, bards, and minstrels from the Nishadha kingdom about Nala's virtues. After drinking in the story of his fame, she, becoming love-sick, would make them stay for a long time to hear more.
पदच्छेदः
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| नलस्य | नल (६.१) | of Nala |
| पृष्टाः | पृष्ट (√प्रछ्+क्त, १.३) | having been asked |
| निषधागताः | निषध–आगत (१.३) | those who came from Nishadha |
| गुणान् | गुण (२.३) | the virtues |
| मिषेण | मिष (३.१) | on some pretext |
| दूतद्विजबन्दिचारणाः | दूत–द्विज–बन्दिन्–चारण (१.३) | messengers, Brahmins, bards, and minstrels |
| निपीय | निपीय (नि√पा+ल्यप्) | having drunk in |
| तत्कीर्तिकथाम् | तद्–कीर्ति–कथा (२.१) | the story of his fame |
| अथ | अथ | then |
| अनया | इदम् (३.१) | by her |
| चिराय | चिराय | for a long time |
| तस्थे | तस्थे (√स्था कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | it was stayed (they were made to stay) |
| विमनायमानया | विमनायमान (३.१) | by her who was becoming love-sick |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | ल | स्य | पृ | ष्टा | नि | ष | धा | ग | ता | गु | णा |
| न्मि | षे | ण | दू | त | द्वि | ज | ब | न्दि | चा | र | णाः |
| नि | पी | य | त | त्की | र्ति | क | था | म | था | न | या |
| चि | रा | य | त | स्थे | वि | म | ना | य | मा | न | या |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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