नृपेऽनुरूपे निजरूपसंपदां
दिदेश तस्मिन्बहुशः श्रुतिं गते ।
विशिष्य सा भीमनरेन्द्रनन्दना
मनोभवाज्ञैकवशंवदं मनः ॥
नृपेऽनुरूपे निजरूपसंपदां
दिदेश तस्मिन्बहुशः श्रुतिं गते ।
विशिष्य सा भीमनरेन्द्रनन्दना
मनोभवाज्ञैकवशंवदं मनः ॥
दिदेश तस्मिन्बहुशः श्रुतिं गते ।
विशिष्य सा भीमनरेन्द्रनन्दना
मनोभवाज्ञैकवशंवदं मनः ॥
अन्वयः
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निजरूपसम्पदाम् अनुरूपे तस्मिन् नृपे बहुशः श्रुतिम् गते, सा भीमनरेन्द्रनन्दना विशिष्य मनोभवाज्ञा-एक-वशंवदम् मनः दिदेश।
Summary
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When that king (Nala), a suitable match for her own wealth of beauty, was repeatedly heard of, she, the daughter of King Bhima, gave him her mind, which had become especially and solely obedient to the commands of the god of love.
पदच्छेदः
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| नृपे | नृप (७.१) | for the king |
| अनुरूपे | अनुरूप (७.१) | who was suitable |
| निजरूपसम्पदाम् | निज–रूप–सम्पद् (६.३) | for her own wealth of beauty |
| दिदेश | दिदेश (√दिश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | gave |
| तस्मिन् | तद् (७.१) | to him |
| बहुशः | बहुशस् | repeatedly |
| श्रुतिम् | श्रुति (२.१) | to hearing |
| गते | गत (√गम्+क्त, ७.१) | having gone (i.e., having been heard of) |
| विशिष्य | विशिष्य (वि√शिष्+ल्यप्) | especially |
| सा | तद् (१.१) | she |
| भीमनरेन्द्रनन्दना | भीम–नरेन्द्र–नन्दना (१.१) | the daughter of King Bhima |
| मनोभवाज्ञैकवशंवदम् | मनोभव–आज्ञा–एक–वशंवद (२.१) | which was solely obedient to the command of the god of love |
| मनः | मनस् (२.१) | her mind |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नृ | पे | ऽनु | रू | पे | नि | ज | रू | प | सं | प | दां |
| दि | दे | श | त | स्मि | न्ब | हु | शः | श्रु | तिं | ग | ते |
| वि | शि | ष्य | सा | भी | म | न | रे | न्द्र | न | न्द | ना |
| म | नो | भ | वा | ज्ञै | क | व | शं | व | दं | म | नः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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