यथोह्यमानः खलु भोगभोजिना
प्रसह्य वैरोचनिजस्य पत्तनम् ।
विदर्भजाया मदनस्तथा मनो-
नलावरुद्धं वयसैव वेशितः ॥
यथोह्यमानः खलु भोगभोजिना
प्रसह्य वैरोचनिजस्य पत्तनम् ।
विदर्भजाया मदनस्तथा मनो-
नलावरुद्धं वयसैव वेशितः ॥
प्रसह्य वैरोचनिजस्य पत्तनम् ।
विदर्भजाया मदनस्तथा मनो-
नलावरुद्धं वयसैव वेशितः ॥
अन्वयः
AI
खलु भोगभोजिना वैरोचनिजस्य पत्तनम् यथा प्रसह्य ऊह्यमानः, तथा मदनः वयसा एव नलावरुद्धम् विदर्भजायाः मनः वेशितः।
Summary
AI
Just as the city of Bali was forcibly carried away by Garuda, so too was the god of love made to enter the mind of Damayanti, which was already occupied by Nala, by the force of her youth alone.
पदच्छेदः
AI
| यथा | यथा | just as |
| ऊह्यमानः | ऊह्यमान (√वह्+यक्+शानच्, १.१) | being carried away |
| खलु | खलु | indeed |
| भोगभोजिना | भोगभोजिन् (३.१) | by Garuda (the snake-eater) |
| प्रसह्य | प्रसह्य (प्र√सह्+ल्यप्) | by force |
| वैरोचनिजस्य | वैरोचनिज (६.१) | of Bali (son of Virochana) |
| पत्तनम् | पत्तन (२.१) | the city |
| विदर्भजायाः | विदर्भजा (६.१) | of Damayanti (the one born in Vidarbha) |
| मदनः | मदन (१.१) | Kama (the god of love) |
| तथा | तथा | so |
| मनः | मनस् (२.१) | the mind |
| नलावरुद्धम् | नल–अवरुद्ध (अव√रुध्+क्त, २.१) | occupied by Nala |
| वयसा | वयस् (३.१) | by youth |
| एव | एव | alone |
| वेशितः | वेशित (√विश्+णिच्+क्त, १.१) | was made to enter |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | थो | ह्य | मा | नः | ख | लु | भो | ग | भो | जि | ना |
| प्र | स | ह्य | वै | रो | च | नि | ज | स्य | प | त्त | नम् |
| वि | द | र्भ | जा | या | म | द | न | स्त | था | म | नो |
| न | ला | व | रु | द्धं | व | य | सै | व | वे | शि | तः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.