रसैः कथा यस्य सुधावधीरिणी
नलः स भूजानिरभूद्गुणाश्रयः ।
सुवर्णदण्डैकसितातपत्रित-
ज्वलत्प्रतापावलिकीर्तिमण्डलः ॥
रसैः कथा यस्य सुधावधीरिणी
नलः स भूजानिरभूद्गुणाश्रयः ।
सुवर्णदण्डैकसितातपत्रित-
ज्वलत्प्रतापावलिकीर्तिमण्डलः ॥
नलः स भूजानिरभूद्गुणाश्रयः ।
सुवर्णदण्डैकसितातपत्रित-
ज्वलत्प्रतापावलिकीर्तिमण्डलः ॥
अन्वयः
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यस्य कथा रसैः सुधा-अवधीरिणी (अस्ति), सः गुणाश्रयः सुवर्णदण्ड-एक-सित-आतपत्रित-ज्वलत्-प्रताप-आवलि-कीर्ति-मण्डलः नलः भूजानिः अभूत् ।
Summary
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There was a king named Nala, a repository of virtues and husband to the earth, whose story, by its sentiments, belittled even nectar. His circle of fame, a blazing series of valor, was like a single white royal umbrella with a golden staff.
पदच्छेदः
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| रसैः | रस (३.३) | by its sentiments |
| कथा | कथा (१.१) | the story |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| सुधावधीरिणी | सुधा–अवधीरिणी (१.१) | which belittles nectar |
| नलः | नल (१.१) | Nala |
| सः | तद् (१.१) | he |
| भूजानिः | भूजानि (१.१) | the husband of the earth (king) |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| गुणाश्रयः | गुण–आश्रय (१.१) | the repository of virtues |
| सुवर्णदण्डैकसितातपत्रितज्वलत्प्रतापावलिकीर्तिमण्डलः | सुवर्ण–दण्ड–एक–सित–आतपत्रित–ज्वलत् (√ज्वल्+शतृ)–प्रताप–आवलि–कीर्ति–मण्डल (१.१) | he whose circle of fame, a blazing series of valor, was like a single white royal umbrella with a golden staff |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | सैः | क | था | य | स्य | सु | धा | व | धी | रि | णी |
| न | लः | स | भू | जा | नि | र | भू | द्गु | णा | श्र | यः |
| सु | व | र्ण | द | ण्डै | क | सि | ता | त | प | त्रि | त |
| ज्व | ल | त्प्र | ता | पा | व | लि | की | र्ति | म | ण्ड | लः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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