निपीय यस्य क्षितिरक्षिणः कथाः
तथाद्रियन्ते न बुधाः सुधामपि ।
नलः सितच्छत्रितकीर्तिमण्डलः
स राशिरासीन्महसां महोज्ज्वलः ॥
निपीय यस्य क्षितिरक्षिणः कथाः
तथाद्रियन्ते न बुधाः सुधामपि ।
नलः सितच्छत्रितकीर्तिमण्डलः
स राशिरासीन्महसां महोज्ज्वलः ॥
तथाद्रियन्ते न बुधाः सुधामपि ।
नलः सितच्छत्रितकीर्तिमण्डलः
स राशिरासीन्महसां महोज्ज्वलः ॥
अन्वयः
AI
यस्य क्षितिरक्षिणः कथाः निपीय बुधाः सुधाम् अपि तथा न आद्रियन्ते, सः सितच्छत्रितकीर्तिमण्डलः महोज्ज्वलः महसाम् राशिः नलः आसीत् ।
Summary
AI
There was a king named Nala, a greatly radiant mass of splendors, whose circle of fame was like a white royal umbrella. Having imbibed the stories of this protector of the earth, the wise do not hold even nectar in such high esteem.
पदच्छेदः
AI
| निपीय | निपीय (नि√पी+ल्यप्) | Having drunk |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| क्षितिरक्षिणः | क्षिति–रक्षिन् (६.१) | of the protector of the earth |
| कथाः | कथा (२.३) | stories |
| तथा | तथा | so much |
| आद्रियन्ते | आद्रियन्ते (आ√दृ भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | are respected |
| न | न | not |
| बुधाः | बुध (१.३) | the wise |
| सुधाम् | सुधा (२.१) | nectar |
| अपि | अपि | even |
| नलः | नल (१.१) | Nala |
| सितच्छत्रितकीर्तिमण्डलः | सित–छत्रित–कीर्ति–मण्डल (१.१) | he whose circle of fame was like a white royal umbrella |
| सः | तद् (१.१) | he |
| राशिः | राशि (१.१) | a mass |
| आसीत् | आसीत् (√अस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was |
| महसाम् | महस् (६.३) | of splendors |
| महोज्ज्वलः | महत्–उज्ज्वल (१.१) | greatly radiant |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | पी | य | य | स्य | क्षि | ति | र | क्षि | णः | क | थाः |
| त | था | द्रि | य | न्ते | न | बु | धाः | सु | धा | म | पि |
| न | लः | सि | त | च्छ | त्रि | त | की | र्ति | म | ण्ड | लः |
| स | रा | शि | रा | सी | न्म | ह | सां | म | हो | ज्ज्व | लः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.