तवापि हा हा विरहात्क्षुधाकुलाः
कुलायकूलेषु विलुठ्यतेषु ते ।
चिरेण लब्धा बहुभिर्मनोरथै-
र्गताः क्षणेनास्फुटितेक्षणा मम ॥
तवापि हा हा विरहात्क्षुधाकुलाः
कुलायकूलेषु विलुठ्यतेषु ते ।
चिरेण लब्धा बहुभिर्मनोरथै-
र्गताः क्षणेनास्फुटितेक्षणा मम ॥
कुलायकूलेषु विलुठ्यतेषु ते ।
चिरेण लब्धा बहुभिर्मनोरथै-
र्गताः क्षणेनास्फुटितेक्षणा मम ॥
अन्वयः
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हा हा, तव विरहात् क्षुधाकुलाः, कुलायकूलेषु विलुठ्यत्सु, बहुभिः मनोरथैः चिरेण लब्धाः, अस्फुटितेक्षणाः ते मम (सुताः) क्षणेन गताः अपि ।
Summary
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The swan laments, "Alas, alas! Due to separation from you, my children—afflicted by hunger, obtained after a long time with many desires, their eyes not yet opened—are gone in a moment, as they were rolling on the edges of the nest."
पदच्छेदः
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| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| अपि | अपि | also |
| हा | हा | alas |
| हा | हा | alas |
| विरहात् | विरह (५.१) | from separation |
| क्षुधाकुलाः | क्षुधा–आकुल (१.३) | afflicted by hunger |
| कुलायकूलेषु | कुलाय–कूल (७.३) | on the edges of the nest |
| विलुठ्यत्सु | विलुठ्यत् (वि√लुठ्+यक्+शतृ, ७.३) | while rolling |
| ते | तद् (१.३) | those |
| चिरेण | चिर (३.१) | after a long time |
| लब्धाः | लब्ध (√लभ्+क्त, १.३) | obtained |
| बहुभिः | बहु (३.३) | with many |
| मनोरथैः | मनस्–रथ (३.३) | desires |
| गताः | गत (√गम्+क्त, १.३) | are gone |
| क्षणेन | क्षण (३.१) | in a moment |
| अस्फुटितेक्षणाः | नञ्–स्फुटित (√स्फुट्+क्त)–ईक्षण (१.३) | whose eyes were not yet opened |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | वा | पि | हा | हा | वि | र | हा | त्क्षु | धा | कु | लाः |
| कु | ला | य | कू | ले | षु | वि | लु | ठ्य | ते | षु | ते |
| चि | रे | ण | ल | ब्धा | ब | हु | भि | र्म | नो | र | थै |
| र्ग | ताः | क्ष | णे | ना | स्फु | टि | ते | क्ष | णा | म | म |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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