अयि स्वयूथ्यैरशनिक्षतोपमं
ममाद्य वृत्तान्तमिमं बतोदिता ।
मुखानि लोलाक्षि दिशामसंशयं
दशापि शून्यानि विलोकयिष्यसि ॥
अयि स्वयूथ्यैरशनिक्षतोपमं
ममाद्य वृत्तान्तमिमं बतोदिता ।
मुखानि लोलाक्षि दिशामसंशयं
दशापि शून्यानि विलोकयिष्यसि ॥
ममाद्य वृत्तान्तमिमं बतोदिता ।
मुखानि लोलाक्षि दिशामसंशयं
दशापि शून्यानि विलोकयिष्यसि ॥
अन्वयः
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अयि लोल-अक्षि ! बत अद्य स्व-यूथ्यैः उदिता (सती) मम इमम् अशनि-क्षत-उपमं वृत्तान्तं (श्रुत्वा) असंशयं दिशाम् दश अपि मुखानि शून्यानि विलोकयिष्यसि ।
Summary
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"Oh, my dear with restless eyes! Alas, when you are told this news of mine by my flock-mates—a tale like a wound from a thunderbolt—you will undoubtedly see all ten directions as empty and void."
पदच्छेदः
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| अयि | अयि | Oh |
| स्व-यूथ्यैः | स्व–यूथ्य (३.३) | by my flock-mates |
| अशनि-क्षत-उपमं | अशनि–क्षत–उपम (२.१) | like a wound from a thunderbolt |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| अद्य | अद्य | today |
| वृत्तान्तम् | वृत्तान्त (२.१) | news |
| इमं | इदम् (२.१) | this |
| बत | बत | alas |
| उदिता | उदित (√वद्+क्त, १.१) | told |
| मुखानि | मुख (२.३) | the faces |
| लोल-अक्षि | लोल–अक्षि (८.१) | O you with restless eyes |
| दिशाम् | दिश् (६.३) | of the directions |
| असंशयं | असंशयम् | undoubtedly |
| दश | दशन् (२.३) | ten |
| अपि | अपि | even |
| शून्यानि | शून्य (२.३) | empty |
| विलोकयिष्यसि | विलोकयिष्यसि (वि√लोक् +णिच् कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will see |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | यि | स्व | यू | थ्यै | र | श | नि | क्ष | तो | प | मं |
| म | मा | द्य | वृ | त्ता | न्त | मि | मं | ब | तो | दि | ता |
| मु | खा | नि | लो | ला | क्षि | दि | शा | म | सं | श | यं |
| द | शा | पि | शू | न्या | नि | वि | लो | क | यि | ष्य | सि |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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