पदे पदे सन्ति भटा रणोद्भटा
न तेषु हिंसारस एष पूर्यते ।
धिगीदृशं ते नृपते कुविक्रमं
कृपाश्रये यः कृपणे पतत्रिणि ॥
पदे पदे सन्ति भटा रणोद्भटा
न तेषु हिंसारस एष पूर्यते ।
धिगीदृशं ते नृपते कुविक्रमं
कृपाश्रये यः कृपणे पतत्रिणि ॥
न तेषु हिंसारस एष पूर्यते ।
धिगीदृशं ते नृपते कुविक्रमं
कृपाश्रये यः कृपणे पतत्रिणि ॥
अन्वयः
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पदे पदे रण-उद्भटाः भटाः सन्ति । तेषु एषः हिंसा-रसः न पूर्यते (किम्)? नृपते ! ते ईदृशं कु-विक्रमं धिक्, यः कृपणे कृपा-आश्रये पतत्रिणि (क्रियते) ।
Summary
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"There are fierce warriors at every step; is your thirst for violence not satisfied on them? Shame on such a wretched act of valor, O King, which you display towards a helpless bird, a natural object of pity."
पदच्छेदः
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| पदे | पद (७.१) | at every |
| पदे | पद (७.१) | step |
| सन्ति | सन्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | there are |
| भटाः | भट (१.३) | warriors |
| रण-उद्भटाः | रण–उद्भट (१.३) | fierce in battle |
| न | न | not |
| तेषु | तद् (७.३) | on them |
| हिंसा-रसः | हिंसा–रस (१.१) | thirst for violence |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| पूर्यते | पूर्यते (√पॄ भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is satisfied |
| धिक् | धिक् | shame on |
| ईदृशं | ईदृश (२.१) | such |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| नृपते | नृपति (८.१) | O King |
| कु-विक्रमं | कु–विक्रम (२.१) | wretched act of valor |
| कृपा-आश्रये | कृपा–आश्रय (७.१) | on an object of pity |
| यः | यद् (१.१) | which |
| कृपणे | कृपण (७.१) | on a helpless |
| पतत्रिणि | पतत्रिन् (७.१) | bird |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | दे | प | दे | स | न्ति | भ | टा | र | णो | द्भ | टा |
| न | ते | षु | हिं | सा | र | स | ए | ष | पू | र्य | ते |
| धि | गी | दृ | शं | ते | नृ | प | ते | कु | वि | क्र | मं |
| कृ | पा | श्र | ये | यः | कृ | प | णे | प | त | त्रि | णि |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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